झांसी। देश में जीएसटी वसूली के आंकड़े भले ही उत्साह बढ़ाने वाले हों पर झांसी जोन में राजस्व की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 1263 करोड़ वसूली का लक्ष्य है। इसकी एवज में अभी तक महज 800 करोड़ ही हासिल हो सके हैं। मार्च में शेष 463 करोड़ की वसूली बड़ी चुनौती है।
देश में जीएसटी वसूली का आंकड़ा लगातार पांचवें महीने एक लाख करोड़ को पार कर गया है। लेकिन जीएसटी के झांसी जोन के आंकड़े इतने उत्साहजनक नहीं हैं। झांसी जोन में झांसी के साथ ही ललितपुर, बांदा और जालौन जिले भी आते हैं। इन चारों जिले के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल 1263 करोड़ वसूली का लक्ष्य था। लेकिन अभी तक 800 करोड़ ही राजस्व प्राप्ति हो सकी है। लक्ष्य पूरा करने के लिए अब 28 दिन ही बचे हैं।
इसमें भी होली, शिवरात्रि, रविवार व अन्य छुट्टियां शामिल कर ली जाएं तो बहुत कम दिन ही रह गए हैं। ऐसे में शेष 463 करोड़ की वसूली कर पूरा लक्ष्य हासिल करना बहुत मुश्किल कार्य है। टैक्स एडवोकेट विजय खन्ना के अनुसार कोरोना काल में बेपटरी हुई कारोबार की रफ्तार अभी तक पूरी तरह नहीं सुधर पाई है। इसका असर क्षेत्र में जीएसटी की राजस्व वसूली पर भी पड़ा है। उन्होंने माना कि मार्च में ही 463 करोड़ वसूल पाना मुश्किल कार्य है।
अवैध खनन को राजनीतिक संरक्षण, राजस्व को लगती मोटी चपत
झांसी जोन में खनन का पर्याप्त काम है। इससे भी सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान होता है। जीएसटी विभाग के सूत्राें के अनुसार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन होता है। अगर नियमानुसार राजस्व मिले तो झांसी जोन का जीएसटी वसूली का न सिर्फ लक्ष्य पूरा हो, क्षेत्र सम्मानजनक स्थिति में रहे। खनन में इस कदर राजनीतिक और रसूखदारों का हस्तक्षेप रहता है कि बदस्तूर अवैध खनन चलता रहता है। न प्रशासन कोई बड़ी कार्रवाई कर पाता है और न पर्याप्त राजस्व वसूली हो पाती है।