लोबान व अगरबत्ती के धुएं से टूटता है रोजा
झांसी। माहे रमजान में रोजेदारों को लोबान व अगरबत्ती से परहेज करना चाहिए लोबान व अगरबत्ती के धुएं को जानबूझ कर सूंघने से इसका असर रोजेदार पर पड़ता है। ऐसे करने से रोजेदार का रोजा जाया हो जाता है। हालांकि गैर इरादतन ऐसा होने पर रोजे पर कोई भी फर्क नहीं होता है।
इस्लामी कैलेंडर का नवां महीना रमजान का होता है। इस महीने में मुस्लिम पूरे महीने रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। पूरे महीने इस्लामी नियमों के अनुसार ही रोजा रखा जाता है। जिस तरह से नमाज पढ़ना हर मुस्लिम पर फर्ज है, उसी तरह से रोजा हर बालिग मर्द व औरत पर फर्ज किया गया है। रोजा रखने के लिए रोजेदारों को कई नियमों का पालन क रना होता है। भूख, प्यास के अलावा भी रोजेदार की हर एक चीज का रोजा होता है।
मुफ्ती साबिर का कासमी ने बताया कि रमजान का महीना मुस्लिमों के लिए इनाम का महीना है। माहे रमजान में सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक हो जाता है। रोजेदार अल्लाह तआला को काफी पसंद होता है। किसी को बदनियत से देखने, चोरी करने, गाली देने के अलावा गीबत करने व झूट बोलने से रोजे की रूहानियत पर फर्क पड़ता है। लोबान व अगरबत्ती के धुएं को जानबूझ कर शरीर के अंदर लेने पर रोजा टूट जाएगा। हालांकि धोखे से या अनजाने में ऐसे होने पर रोजे पर कोई फर्क नहीं होता है।
काजल व सूरमा लगाने से नहीं टूटेगा रोजा
रोजे की हालत में सुरमा व काजल लगाने से इसका कोई भी असर रोजे पर नही पड़ता है। इसको लगाने से दिन भर के रोजे पर कोई भी फर्क नहीं होगा व रोजा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।
रमजान का पहला जुमा आज
माहे रमजान का पहला जुमा कल है। जुमे को देखते हुए मस्जिदों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। पहले जुमे में आने वाले भीड़ को देखते हुए मस्जिदों के बाहर तक पंडालों को लगा दिया गया है। जुमे की नमाज से पहले इमाम रमजान की अहमियत पर तकरीर करेंगे।