वातानुकूलित कोच के मुसाफिरों को मिलने भी लगी है। कोचों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिसनिंग सिस्टम) भी लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को अगले स्टेशन की जानकारी कोच में लगाए जा रहे बोर्ड पर मिल जाएगी। यह बदलाव रेलवे की उत्कृष्ट योजना के तहत किया जा रहा है।
रेलवे बोर्ड की इस योजना के तहत झांसी रेल मंडल में ग्वालियर से वाराणसी के बीच चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस को चुना गया। इस ट्रेन में उत्कृष्ट प्रणाली का एक रैक चलने लगा है। इस रैक का आधुनिक तरीके से कायाकल्प किया गया है। कोच के अंदर व बाहर नए रंगों में पेंटिंग की गई है, जिससे माहौल रंग बिरंगा दिखाई दे रहा है। शौचालय, वॉश बेसन व दरवाजे के आसपास की दीवारों को भी रंगा गया है। आरामदायक शौचालय बनाए गए हैं। शौचालय के बाहर प्लास्टिक के मैट बिछाए गए हैं।
इसके अलावा हर कोच में जीपीएस भी लगाया जा रहा है। इस सिस्टम के शुरू होने पर कोच के अंदर बैठकर ही यात्री इंडीकेशन बोर्ड पर अगले स्टेशन के आने की जानकारी, वक्त व किलोमीटर देख सकेंगे। अन्य यात्री सुविधाएं बेहतर की गई हैं। इस ट्रेन के वातानुकूलित कोचों में अब यात्रियों को सफेद की जगह गुलाबी रंग के चादरें दी जाएंगी। इसकी शुरुआत प्रथम श्रेणी के वातानुकूलित कोच के मुसाफिरों से हो गई है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस के उत्कृष्ट रैक में फर्स्ट एसी के यात्रियों को गुलाबी रंग की चादरें दी जा रही हैं। अन्य वातानुकूलित कोचों में भी यह सुविधा जल्द मिलने लगेगी।
ट्रेन में कोचों की स्थिति
बुंदेलखंड एक्सप्रेस में सात स्लीपर, छह जनरल व दो थर्ड एसी, एक सेकेंड एसी व एक फर्स्ट और सेकेंड एसी कोच आधा- आधा लगा रहता है। प्रतिदिन इस ट्रेन से ग्वालियर से वाराणसी के बीच पांच हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं।