किसान नहीं ‘सन्नाटा’ बाजार
झांसी। गल्ला मंडी के नजदीक बना किसान बाजार ग्राहकों के अभाव में बदहाल हो गया है। इसमें 122 दुकानें हैं, जिनमें सिर्फ 22 ही खुल रही हैं। जो खुली हैं उनके भी मोबाइल के सर्विस सेंटर या ऑफिस खुले हैं। सुविधाओं के नाम पर न तो पीने का पानी मिल रहा है और न ही सफाई हो रही है। कीमती पेड़-पौधे सूख चुके हैं। सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। पैसा वापस मिल जाए तो व्यापारी दुकानें छोड़ने तक को तैयार हैं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गल्लामंडी के नजदीक एक नवंबर 2013 को आठ करोड़ से निर्मित किसान बाजार का लोकार्पण किया था। इस आधुनिक किसान बाजार में 122 दुकानें हैं। दुकानेें 99 साल के पट्टे पर दी गई हैं। शुरूआत में किसान जोन की 22 दुकानों को सम्मानित कृषकों 7.90 लाख रुपये में उपलब्ध कराया गया। यह किसान अभी तक कुल राशि का 25 फीसदी जमा कर चुके हैं। यूटीलिटी, फ्री, फूड और किड्स जोन की दुकानों को 11.15 लाख से अधिक राशि पर नीलाम किया गया। तत्कालीन अफसरों ने व्यापारियों को बड़े-बड़े ख्वाब दिखाए कि यहां अंतर्राष्ट्रीय बाजार का माहौल दिया जाएगा। प्रचार प्रसार कर दूर-दूर से ग्राहकों को बुलाया जाएगा। कार्यक्रम आयोजित होेंगे। इन हसीन ख्वाबों में फंसकर व्यापारियों ने अपने लाखों रुपये फंसा दिए। अधिकांश ने बैंक से ब्याज पर पैसा ले रखा है। सुंदर फर्नीचर लगवाया और दुकान खोलकर बैठ गए। किसान बाजार में एक से बढ़कर कपड़ों के शोरूम और खानपान की दुकानें खोली गईं। दो करोड़ की लागत से राठ के एक व्यापारी ने विराट फन खोलकर रखा है, जिसमें 9 डी थिएटर के साथ ही बच्चों के लिए एक से बढ़कर खेल उपलब्ध हैं। मगर, मंडी समिति की अनदेखी से यहां ग्राहकों की आवाजाही नहीं बढ़ सकी। ग्राहकी न होने से 102 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान पर ताले डाल दिए हैं। जो दुकानें खुल रही हैं, उनमें ऑफिस या थोक व्यापार का संचालन हो रहा है। हालात यह है कि व्यापारियों को पैसा वापस मिल जाए तो वह दुकान छोड़ने तक को तैयार है।
वहीं, 2017 में मेंटेनेंस का ठेका खत्म होने के कारण किसान बाजार में सुविधाओं का बुरा हाल हो गया है। जगह-जगह कूंड़ा पड़ा है। दीवारों पर जाले लग गए हैं। पीने के पानी का एकमात्र वाटर फिल्टर खराब हो चुका है। शौचालय में गंदगी से पटे हैं। जगह-जगह दीवारें क्षतिग्रस्त होेने लगी हैं। टाइल्स निकल रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी तक नहीं है। पेड़ पौधे सूख चुके हैं। चारों तरफ बदहाली का माहौल बनता जा रहा है।
जिन्होंने व्यापारियों को ख्वाब दिखाया वह अधिकारी चले गए हैं। मैंने बाजार के मेंटेनेंस के लिए उपनिदेशक कृषि लखनऊ को पत्र लिखा है। प्रवेश द्वार के सामने से दीवार हटाने के लिए भी अनुमति मांगी है। बिजली का बकाया भी जमा करने के बाद दुकानदारों से अलग-अलग कनेक्शन लेने के लिए कहा जाएगा, ताकि एक साथ बाजार की पूरी बिजली बंद न हो सके। सभी समस्याओं को दूर करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जा रहा है। - जगत सिंह तेवतिया, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति।