फसलों के नुकसान के आकलन में गड़बड़ी
सब हेड: तहसील की रिपोर्ट में क्षति कम बताई, मौके पर मिली ज्यादा
- एसडीएम से स्पष्टीकरण तलब, एडीएम ने खेतों में जांची हकीकत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बारिश से फसलों को हुए नुकसान के आकलन में गड़बड़ी सामने आई है। तहसील से आई रिपोर्ट में क्षति कम आंकी गई थी, जिससे किसानों को मुआवजा मिलने की उम्मीद भी नहीं रह गई थी। जबकि, मंगलवार को अपर जिलाधिकारी ने खेतों पर जाकर हालात देखे, तो स्थिति कुछ और निकली। नुकसान कहीं अधिक पाया गया। इस स्थिति पर गरौठा के उप जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए तहसीलों को प्लाट टू प्लाट सर्वे के निर्देश दिए गए थे। एक पखवाड़े पहले तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन अब तक केवल गरौठा और मोंठ तहसील की ही रिपोर्ट आई है। इनमें भी नुकसान कम दर्शाया गया है। नियमानुसार 33 फीसदी से अधिक फसल नष्ट होने पर मुआवजा देने का प्रावधान है, परंतु दोनों तहसीलों की रिपोर्ट में नुकसान कम ही दर्शाया गया। तहसीलों से आई रिपोर्ट की पुष्टि करने के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) नगेंद्र शर्मा मंगलवार को किसानों के साथ खेतों में पहुंचे। गरौठा तहसील के ग्रामों के भ्रमण के दौरान उन्होंने उड़द की फसल में 50 फीसदी तक नुकसान पाया। कई स्थानों पर तो नुकसान का ये आंकड़ा 70 फीसदी तक मिला। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने उप जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।
वहीं, एडीएम नगेंद्र शर्मा ने बताया कि तहसीलों को प्लाट टू प्लाट सर्वे के निर्देश दिए गए थे, लेकिन रिपोर्टों से ऐसा लग नहीं रहा है। लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर तहसील की रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई है। जबकि, उप जिलाधिकारी को स्वयं इसकी जांच करनी चाहिए थी। सभी तहसीलों के एसडीएम को फसलों की क्षति का वास्तविक सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
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बोया है नहीं, बेचने की तैयारी
झांसी। एक अक्तूबर से धान की खरीद प्रारंभ हो रही है। इसके लिए किसानों को पहले पंजीकरण कराना है। झांसी सदर तहसील के अब तक 13 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। एडीएम द्वारा पंजीकृत किसानों की जांच कराई गई, तो पाया कि 13 में पांच किसान ही सही है, जबकि आठ ऐसे किसानों ने पंजीकरण करा लिया है, जिन्होंने अपने खेतों में धान बोई ही नहीं है। इनमें पंजीकरण निरस्त कर दिए गए।