फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्यप्रदेश के 40 गांवों ने बिगाड़ा झांसी के खाद का गणित

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। जिले में खाद का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। खाद की आपूर्ति लगातार हो रही है, इसके बाद भी किसानों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। खासकर मध्य प्रदेश के ऐसे गांवों के किसान जिले में खाद खरीदने आ रहे हैं, जिनकी जमीन उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों प्रांतों में है। पिछले दिनों हुई खाद की दुकानों के दस्तावेजों की जांच में सामने आया था कि मध्यप्रदेश के किसान जिले से खाद खरीद रहे हैं। ऐसे में खाद का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
विज्ञापन

रबी सीजन में जिले में 3,40,509 हेक्टेयर में बुवाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से सर्वाधिक 1,54,068 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई का लक्ष्य है। जिले में डीएपी वितरण का लक्ष्य 31 हजार मीट्रिक टन है और अब तक 25 हजार मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। जिले के करीब चालीस गांव ऐसे हैं, जिनकी सीमा मध्यप्रदेश के जुड़ी हुई है। इन गांवों के किसानों की जमीन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के गांवों में है। ग्राम कचनेव, कगर, उरदौरा, अड़जार, टेहरका, घूघसी, जावन समेत कई गांव ऐसे हैं, जहां के किसान दोनों प्रांतों में खेती करते हैं। यह किसान खाद के लिए अपनी किसान बही लगा रहे हैं। इन्हें खाद तो मिल जा रही है, लेकिन खाद विक्रेता असमंजस में हैं कि उन्हें खाद दिया जाए या नहीं। क्योंकि, यदि खाद उनको दे रहे हैं तो कालाबाजारी में फंसने का अंदेशा है और नहीं दे रहे हैं तो हंगामा होने के आसार हैं।
पिछले दिनों मऊरानीपुर में इस तरह के किसान पकड़े गए थे, जो मध्यप्रदेश से खाद लेने आए थे। लेकिन, अब मऊरानीपुर और गरौठा में डीएपी की मांग घट गई है, इस कारण यहां की दुकानों पर किसानों की भीड़ छंट गई है। अब सदर तहसील झांसी के गांवों में डीएपी की मांग चल रही है। यही कारण है कि अब तहसील क्षेत्र की सहकारी समितियों पर किसानों की भीड़ लग रही है। इन समितियों पर सात मीट्रिक टन खाद का स्टाक है।
विज्ञापन

कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन मध्यप्रदेश के बार्डर के गांवों में है। वह किसान जिले में नजदीक केंद्रों से खाद ले रहे हैं। बार्डर पर जमीन होने का कारण तय कर पाना बड़ा मुश्किल होता है कि वास्तव वे किसान उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं या मध्य प्रदेश के। फिर भी दूसरे प्रांत के किसानों को खाद न दी जाए, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन

- केके सिंह, उप कृषि निदेशक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें