झांसी। बजट की कमी से लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने के काम पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। जलनिगम ने बाकी काम को पूरा कराने के लिए 39 करोड़ रुपये बजट का नया प्रस्ताव तैयार किया है। नगर विकास विभाग लखनऊ के पास प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस बजट से तालाब के चारों तरफ डाली गई मिट्टी पर पाथवे बनाने, चारों तरफ पार्क, स्टेडियम की तरह गोल आकार में बैठने के लिए सीढ़ियां बनाने काम होना है।
लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने की योजना 2015 में शुरू हुई थी। योजना के लिए 54 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इस बजट में लक्ष्मी तालाब में गिरने वाले नालों के पानी को रोकना, तालाब की सफाई, नाले के पानी को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण, तालाब से ट्रीटमेंट प्लांट तक पाइप लाइन डालने का काम होना था। इसमें तालाब की सफाई का काम पूरा हो गया है। नालों का रास्ता बदल दिया गया है। साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम अंतिम चरण में चल रहा है। दिसंबर तक प्लांट को चालू करने की तैयारी चल रही है।
बाद में तालाब के चारों तरफ डाली गई मिट्टी पर पत्थर लगाकर पाथवे बनाने, पाथवे के दोनों तरफ पिचिंग का काम (बांधों में तलहटी के पास लगे रहने वाले पत्थरों की तरह), चारों तरफ पार्क का निर्माण, स्टेडियम की तरह गोल आकार में बैठने के लिए सीढ़ियां बनाने आदि काम कराने का निर्णय लिया गया। मगर, विभाग को 54 करोड़ में यह काम पूरा होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि, अभी 54 करोड़ में 39 करोड़ ही अभी खर्च हुए हैं। इसके बाद भी विभाग ने 39 करोड़ रुपये बजट का नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए नगर विकास के पास भेजा जा रहा है।
मालूम हो कि लक्ष्मी तालाब में पहले शहर क्षेत्र के गंदे नालों का 18 लाख लीटर पानी प्रतिदिन गिरता था। मगर, सफाई और चारों तरफ पाथवे बनाने के लिए मिट्टी डलने से अब तालाब में नालों का गंदा पानी नहीं जा रहा है। तालाब सुरक्षित हो गया है। जल्द ही नारायण बाग के पास बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा होने वाला है। इसके बाद नालों के पानी को यहां साफ करने का काम शुरू हो जाएगा। इसमें चार लाख लीटर पानी तालाब और बाकी का नारायण बाग की तरफ जाने वाले नाले में बहा दिया जाएगा।
लक्ष्मी तालाब के बाकी कामों को पूरा कराने के लिए 39 करोड़ का नया प्रस्ताव तैयार कर नगर विकास विभाग को भेजा जा रहा है। साथ ही 54 करोड़ मेें से जो बजट बचा है, उससे धीमे- धीमे काम चलते रहेंगे।
- नरेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता (निर्माण शाखा, जलनिगम)।