झांसी। जनपद में जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को किए जाने वाले भुगतान की स्थिति ठीक नहीं है। मौजूदा समय में 36 फीसदी लाभार्थियों का भुगतान लटका हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसके लिए बैंक को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
गौरतलब है कि सरकारी इकाइयों में प्रसव कराने पर ग्रामीण लाभार्थी को चौदह सौ रुपये और शहरी लाभार्थी को एक हजार रुपये दिए जाते हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अप्रैल से सितंबर माह तक सरकारी इकाइयों में 11,543 प्रसव हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 11,543 लाभार्थियों में से अभी तक 5,685 ग्रामीण और 1758 शहरी प्रसूताओं यानी 64 फीसदी के ही भुगतान किए गए हैं। 36 फीसदी लाभार्थी अभी भी योजना का लाभ पाने को सरकारी महकमे का मुंह ताक रही हैं।
इस संबंध में जेएसवाई के प्रभारी अधिकारी डॉ. आर एस वर्मा ने बताया कि बैंक की मनमानी के चलते लाभार्थियों का भुगतान फंसा हुआ है। बैंक में लाभार्थियों का खाता नहीं खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के मुताबिक जिस लाभार्थी को सरकारी मदद मिल रही होती है, उसका स्व प्रमाणित फोटो के आधार पर बैंक में खाता खुलता है। इसके अलावा जच्चा-बच्चा कार्ड पर दर्ज एमसीटी नंबर के आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभारी लाभार्थी की फोटो प्रमाणित कर देता है, जिसकी मदद से बैंक में खाता खुल जाता है। इसके बावजूद बैंक लाभार्थियों के खाते नहीं खोल रहे हैं।
एमओआईसी भी सुस्त जेएसवाई के अंतर्गत लाभार्थियों के भुगतान के मामले में एमओआईसी द्वारा भी रुचि नहीं दिखाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो एमओआईसी की सुस्ती का नतीजा है कि बैंक में लाभार्थियों के खाते नहीं खुल पा रहे। यदि एमओआईसी थोड़ी दौड़ भाग कर लें तो कई लाभार्थियों को समय से लाभ मिल सकेगा।