स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लाखों रुपये से नवीन कृषि उत्पादन मंडी में बनाए गए प्रसाधन केंद्र शोपीस बनकर रह गए हैं। इन पर मंडी में कहीं ताले लटके हैं तो मुख्य गेट के बगल में बने प्रसाधन केंद्र का किसान उपयोग नहीं करते हैं। इस तरह गल्ला मंडी में स्वच्छता अभियान दिखावा साबित हो रहा है।
देश को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन चलाया जा रहा है। इसमें व्यक्तिगत शौचालय से लेकर सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। नवीन कृषि उत्पादन मंडी स्थल पर किसानों के उपयोग के लिए सुलभ कांप्लेक्स का निर्माण किया गया है। इसमें एक मुख्य गेट के पास ही बना है तो दूसरा पुलिस चौकी के पास बना है। तीसरा मंडी के बीच में बना हुआ है। मुख्य गेट के पास कांप्लेक्स किसानों के लिए खुला हुआ है, लेकिन किसान इसमें जाते नहीं हैं।
वहीं, समीप में बना यूरिनल गंदगी से अटा पड़ा है। पुलिस चौकी के पास सुलभ कांप्लेक्स तालाबंदी के कारण शोपीस बनकर रह गया है। वहीं, गल्ला मंडी के बीचोबीच बने सुलभ कांप्लेक्स की हालत ठीक नहीं है। इसमें अक्सर ताला लगा रहता है। इसके बगल में बने यूरिनल में साफ-सफाई का अभाव बना हुआ है। इसके अलावा गल्ल मंडी की नालियों में पेड़ों की सूखी पत्ती पड़ी हुई हैं तो कहीं नालियां सफाई के अभाव में बजबजा रही हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मंडी समिति किसानों को स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं कर पाई है, जिससे लाखों रुपये से बनाए गए सुलभ कांप्लेक्स अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। इसके बाद भी समिति पूरे मामले पर चुप है। ऐसे में गल्ला मंडी स्वच्छ नहीं रह पा रही है।
गल्ला मंडी में किसानों को सुविधाएं देने के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी मंडी में किसानों को सुविधाएं मुहैया नहीं होती हैं। सभी जगह अव्यवस्थाएं देखी जा सकती हैं।
- चंदन सिंह, कर्रा डोंगरा
गल्ला मंडी के अंदर बनाए गए सुलभ कांप्लेक्सों में अक्सर ताले पड़े रहते हैं। जो खुले हैं, उनमें साफ-सफाई का अभाव बना हुआ है। जिस कारण किसान उनका इस्तेमाल करने से कतराते हैं।
- कमल सिंह, वेटना
किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं का प्रचार- प्रसार किया जाए। गल्ला मंडी का क्षेत्र बना होने से किसानों को मुहैया कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ही नहीं हो पाती है।
- प्रकाश चंद चंदेल, खिरियाउवारी
गल्ला मंडी में किसानों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। सुलभ कांप्लेक्स हर समय खुले रहते हैं, किसान इनका उपयोग कम ही करते हैं।
- पुष्पेंद्र कुमार, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी