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राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में रिमझिम का चयन

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सांकेतिक तस्वीर
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 ग्रामीण क्षेत्र की एक और महिला खिलाड़ी जनपद का नाम रोशन करने जा रही है। बबीना क्षेत्र की रहने वाली रिमझिम वर्मा का चयन महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। वह 20 अप्रैल से प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी।

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रिमझिम वर्मा ने बताया कि उनके पिता पहलवान हैं और बुआ राजे रूपाली राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी हैं। दोनों की खेल में रुचि देखकर आठ साल पहले उनके अंदर खेल भावना जागी और बबीना में आर्मी के मैदान पर फुटबॉल खेलना शुरू किया। पिता और बुआ ने उसके खेल को भांपा और प्रशिक्षित करना शुरू किया। बाद में रिमझिम जूनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण लेने लगीं। बुआ ने भतीजी को खेल में कॅरियर बनाने के लिए रेलवे इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण दिलाया। खेल मैदान में जगह न होने के कारण बाद में वह मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने लगीं।

जिला फुटबॉल संघ के सचिव अब्दुल सगीर ने बताया कि प्रशिक्षक रामसेवक रजक ने खिलाड़ी के अंदर हुनर देखा और प्रशिक्षण देने लगे। पहली बार बाराबंकी में आयोजित राज्य प्रतियोगिता में रिमझिम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ गोल दागकर टीम को जीत दिलाई थी। बाराबंकी में उनके खेल प्रदर्शन को देख चयनकर्ताओं ने उन्हें राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल करने का फैसला लिया। हाल ही में रिमझिम आगरा में दो से 16 अप्रैल तक प्रशिक्षण कैंप में अपने खेल को और बेहतर बनाएंगी। रिमझिम की इस सफलता पर प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर, शेख रफीक उद्दीन, अरविंद कुमार, आरिफ, योगेश वर्मा, शहंशाह अली ने बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
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एक और राष्ट्रीय खिलाड़ी दिया जूनियर रेलवे इंस्टीट्यूट ने
जूनियर रेलवे इंस्टीट्यूट कई नामी राष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। उनमें से एक और खिलाड़ी निकली है, जो जनपद का नाम रोशन करने जा रही है। जिला फुटबाल संघ के सचिव अब्दुल सगीर ने कहा कि ऐसा मैदान जो खिलाड़ियों के कॅरियर को संवार रहा है। उस मैदान का अस्तित्व समाप्त करने का प्रयास लगातार रेलवे की तरफ से किया जा रहा है। उन्होंने इस पर निराशा जताते हुए कहा कि यह मैदान खिलाड़ियों के लिए भाग्यशाली है और मैदान छिन जानने से एक नहीं बल्कि कई फुटबॉल प्रेमियों में इस बात को लेकर रोष है।

ग्रामीण क्षेत्रों से निकल रहीं प्रतिभाएं
खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए युवा कल्याण विभाग को जमीन चिह्नित कर स्टेडियम बनाए जाने थे लेकिन आज तक जमीन नहीं चिह्नित नहीं हुई। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधा हो जाए तो वहां खिलाड़ियों को अपना खेल कॅरियर सुधारने का मौका मिलेग। ऐसे एक नहीं बल्कि कई और खिलाड़ी होंगे, जो जनपद का नाम रोशन करेंगे।

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