लोकसभा चुनाव से पहले करें विवाह की ‘तैयारी’
झांसी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शासन की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। आने वाले समय में लोकसभा चुनाव होने हैं, आचार संहिता लगने से विवाह कार्य में बाधा पहुंच सकती है। इसलिए चुनाव से पहले ज्यादा से ज्यादा गरीब कन्याओं की शादी कराने का निर्णय लिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने नगर आयुक्त और अपर मुख्य अधिकारी को चिट्ठी लिखकर योजना के बारे में लोगों को जानकारी देने तथा स्वयंसेवी संगठनों से सहयोग लेने को कहा है, ताकि अधिक से अधिक गरीब कन्याओं की शादी कराई जा सके।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत बेटी के गरीब पिता को एक नया पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है, बल्कि पूरा आयोजन सरकार की ओर से होता है। योजना के अंतर्गत बीस हजार रुपये गरीब कन्या के बैंक खाते में जमा कराए जाते हैं। दस हजार रुपये की गृहस्थी का सामान जिसमें एक मोबाइल फोन, दुल्हन को दो साड़ियां, सात बर्तन, दूल्हे को एक जोड़ी सफारी का कपड़ा, एक- एक जोड़ी बिछिया और पायल दिए जाते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये होनी चाहिए। आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड लगाना अनिवार्य है।
योजना को शुरू हुए एक साल हो गया है, लेकिन अभी तक जिले में सिर्फ 43 गरीब कन्याओं के विवाह हो सके हैं। प्रशासन के पास अभी भी 320 कन्याओं की शादी कराने का बजट शेष है। मुख्यमंत्री की ओर से कोई लक्ष्य नहीं है। सिर्फ ज्यादा से ज्यादा कन्याओं की शादी कराने के निर्देश हैं।
विवाह की धीमी प्रगति को देखते हुए शासन के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी निखिल टी. फुंडे ने नगर आयुक्त और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र लिखा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव की संभावित आचार संहिता को देखते हुए विवाह पंजीकरण कराने के लिए प्रचार- प्रसार कराया जाए। नवंबर और दिसंबर महीने में ज्यादा से ज्यादा विवाह कराएं। विवाह कराने के लिए नगर निगम, नगर पंचायतें, नगर पालिकाएं और खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।