असर का लोगो और पीडीएफ जरूर लगाएं
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बीयू शिक्षक को क्लीन चिट
- आईटी विभाग की छात्रा ने लगाया था सही नंबर न देने का आरोप
- जांच कमेटी ने परीक्षा व मूल्यांकन कार्य से संबंधित प्रतिबंध हटाया
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आईटी विभाग के शिक्षक को फर्जीवाड़ा कर फंसाने के मामले की जांच पूरी हो गई है। जांच कमेटी ने शिक्षक को क्लीन चिट दे दी है। कमेटी ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। यह हाल तब है, जब राजभवन से रोक होने के बाद कॉपी का मूल्यांकन कराया गया। ऐसा करके सीधे राजभवन के आदेशों की अवहेलना की गई।
गौरतलब है कि आईटी विभाग की बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा ने रिजल्ट आने के बाद प्रार्थनापत्र देकर लीनियर एल्जेब्रा एंड मैट्रिक्स विषय की कॉपी की प्रति निकलवाई थी। परीक्षक डॉ. धर्मेंद्र बादल ने कॉपी में छात्रा को 65 में 36 नंबर दिए थे। प्रति देखने के बाद छात्रा ने परीक्षक पर कुछ प्रश्नों के उत्तर के नंबर नहीं देने का आरोप लगाया। राजभवन से पुनर्मूल्यांकन न करने का आदेश होने के बावजूद बीयू के कुछ अधिकारी, कर्मचारियों ने मिलीभगत कर दूसरे विषय के परीक्षक से कॉपी की जांच करा दी। इसके बाद नंबर बढ़कर 52 हो गए। यह प्रकरण कार्य परिषद में ले जाकर डॉ. धर्मेंद्र को परीक्षा एवं मूल्यांकन कार्य से डिबार कर दिया गया। डॉ. धर्मेंद्र ने कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि कुछ लोग मिलीभगत कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें फंसाने के लिए अन्य शिक्षक से पुनर्मूल्यांकन कराया है। इस प्रकरण को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया, तब जाकर बीयू प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की। लगभग चार महीने जांच चलने के बाद आखिरकार कमेटी ने डॉ. बादल को क्लीन चिट दे दी और परीक्षा एवं मूल्यांकन कार्य करने से संबंधित प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव को समाप्त कर दिया। कमेटी ने षड़यंत्रकारियों के न तो नाम उजागर किए और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की पेशकश की।