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फोटो, रेलवे कंट्रोलर की मीटिंग-City

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ट्रेन कंट्रोलर को मिले साप्ताहिक अवकाश, विशेष भत्ता भी
नेशनल एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में उठाई आवाज
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
आल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में काम के बढ़ते दबाव पर चर्चा की गई। साथ ही नेताओं ने साप्ताहिक अवकाश की मांग भी रखी। कुछ अन्य समस्याओं और मांगों पर भी विस्तार से बात की गई।
ध्यानचंद स्टेडियम के पास स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में मुख्य अतिथि डीआरएम एके मिश्रा ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कंट्रोलरों का काम कठिन है। ट्रेन कंट्रोलर रेलवे की धड़कन हैं और रेल प्रशासन उनकी हर समस्या को दूर करने में उनके साथ है। वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक कुलभूषण ने कंट्रोलरों को परिचालन की धुरी बताया। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सिंह ने मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन पर उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना में मुख्य संरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट को नकारते हुए रेलमंत्री से उपलब्ध साक्ष्यों पर निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की।
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राष्ट्रीय महासचिव अनिल भार्डा ने कहा कि पूर्व के अधिकारी कंट्रोलरों की जगह फील्ड में काम करने वाले स्टेशन मास्टर, गार्ड, ड्राइवर पर दबाव बनाते थे, मगर अब उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। सबसे ज्यादा काम करने के बावजूद कंट्रोलरों को सबसे ज्यादा चार्जशीट मिलती हैं। अधिकांश कर्मचारी असाध्य बीमारियों से ग्रसित हैं, उनके स्वास्थ्य के प्रति रेल प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। हर महीने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन होना चाहिए। इस मौके पर मंडल अध्यक्ष आरएन शुक्ला, मंडल सचिव जेपी भार्गव, उपाध्यक्ष आरके जायसवाल, प्रवक्ता अजय कुमार द्विवेदी, राजीव मित्तल, बीएस यादव, दीपांशु डे, अमरीश त्रिवेदी, अनूप तिवारी, पीके साहू, विनोद कुमार उपस्थित थे। संचालन डीके शर्मा ने किया।
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ये हैं मांगे
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- ड्यूटी रोस्टर में बदलाव और साप्ताहिक अवकाश।
- रनिंग स्टाफ की तरह विशेष भत्ता दिया जाए।
- काम के दौरान निर्णय लेने की छूट दी जाए।
- ग्रेड-पे 4,800 और 5,400 किया जाए।
- अधिकारी अनावश्यक काम का दबाव न बनाएं।
- हर महीने कंट्रोल आफिस में स्वास्थ्य शिविर लगाएं।
- सरकारी आवासों के रखरखाव पर ध्यान दें।
- चार्जशीट थमाने का सिलसिला बंद हो।

कंट्रोलर का काम
रेलवे में ट्रेनों को चलाने का काम मंडल नियंत्रण कार्यालय (कंट्रोल) से होता है। ट्रेनों को इसी आफिस से कंट्रोल किया जाता है। रेल मंडल की सीमा में ट्रेन के प्रवेश करने के बाद कंट्रोलर उसे संचालित करते हैं। स्टेशन मास्टरों से समन्वय बनाते हैं। इन कर्मचारियों की छह घंटे की ड्यूटी होती हैं और इनको कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता है।
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