मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण कार्यक्रम का नाम बदलकर जहां सघन मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान का नाम दिया गया है, वहीं उक्त अभियान का निर्धारित लक्ष्य से दो वर्ष पहले अर्थात 2018 में पूरा करने के आदेश शासन ने दिए हैं। यह जानकारी शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में आयोजित मीडिया वर्कशॉप में स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आयोजित मीडिया वर्कशॉप में जानकारी देते हुए अपर चिकित्साधिकारी डा. जेएस बक्शी ने बताया कि सघन मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान के तहत लाभार्थी गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण का 90 प्रतिशत लक्ष्य पहले वर्ष 2020 तक किया जाना था, लेकिन अब शासन द्वारा इसमें बदलाव करते हुए यह टीकाकरण 2018 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। टीकाकरण छह बिंदुओं में निर्धारित किया गया है। इसके तहत पहला जहां एएनएम पद खाली यानि उपकेंद्र रिक्त चल रहे हैं। दूसरा ऐसे क्षेत्र जहां तीन महीने से टीकाकरण नहीं हो सका है। तीसरा ऐसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र जहां भुवंतु अर्थात जहां ऐसी अस्थायी आबादी बस जाती है, जो व्यवसायिक उद्देश्य से कुछ समय के लिए किसी क्षेत्र में रहने लगते हैं और वह कार्य पूरा होने पर अन्य स्थानों पर पलायन कर जाते हैं, जैसे लोहगड़िया आदि समुदाय के लोग। चौथे बिंदु में ऐसे क्षेत्र आएंगे जहां नियमित टीकाकरण होता है, लेकिन वहां अन्य गांव के लोग टीकाकरण को पहुंचते हैं। पांचवे बिंदु के तहत ऐसा क्षेत्र जहां ऐसी बीमारियां हो जाएं कि उस दौरान वहां टीकाकरण से रोका गया हो। अंतिम बिंदु ऐसा क्षेत्र जहां नियमित टीकाकरण का आच्छादन कम हो। उक्त अभियान के लिए आंगनबाड़ी और आशाओं के माध्यम से हेड काउंसिल सर्वे कराया गया था, जिसके आधार पर गर्भवती महिलाओं और ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया था, जिनका टीकाकरण होना है।
यह अभियान चार चरणों में होगा, पहला चरण इस माह में अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर और अगले वर्ष जनवरी में होगा। हालांकि इस अभियान की शुरुआत तो सात अक्टूबर से ही होनी थी, लेकिन अब सात अक्तूबर को इसकी शुरुआत के लिए रैली का आयोजन ही किया जाएगा, जबकि नौ अक्टूबर को पहले दिन टीकाकरण की शुरुआत होगी। सघन मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान के लिए पूरे देश में 117 जनपदों और 18 शहरी क्षेत्रों को चुना गया है। जबकि उत्तर प्रदेश में इसके लिए 52 जिले और आठ शहरी क्षेत्रों को चुना गया है। सीएमओ डा. प्रताप सिंह ने बताया कि इस अभियान के तहत टीकाकरण के लिए लगाई जाने वाली वैक्सीन से पहली बार में बुखार आता है और टीकाकरण वाले अंग में सूजन आती है। यह वैक्सीन तीन चरणों में लगाई जाती है, जिसमें तीसरे चरण में ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी। उन्होंने आगे बताया कि गत 21 जुलाई से आठ अगस्त में हुए एक सर्वे में जनपद में 9, 868 बच्चे और 5, 394 महिलाएं उक्त टीकाकरण से वंचित रह गए हैं। मीडिया वर्कशॉप में डा. भाग्यश्री, डा.राजेश भारती, मुकेश चौधरी आदि उपस्थित रहे।