झांसी। बुलंदशहर में जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत होने के बाद भी जिला प्रशासन नहीं चेता। शनिवार को भी दिन भर महानगर के सभी थाना क्षेत्रों में कच्ची शराब धड़ल्ले से बिकती रही। अमर उजाला के कैमरे में कच्ची शराब बेचने वालीं महिलाएं कैद हुईं। कैमरा देखकर महिलाएं यहां-वहां भागती नजर आईं। पुलिस व आबकारी विभाग की मिलीभगत के चलते अवैध कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है।
जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगर के पॉश इलाकों में तीस-तीस रुपये में कच्ची शराब थैलियां में रखकर धड़ल्ले से बेची जा रही है। इसकी बानगी ग्वालियर मार्ग से सटी अयोध्या पुरी कॉलोनी में देखी जा सकती है। यहां घनी आबादी के बीचों बीच सड़क किनारे खुलेआम ये कारोबार संचालित हो रहा है। दिन भर पियक्कड़ों का जमघट लगा रहता है, जो जान की परवाह किए बगैर नशे की लत को पूरा करने के लिए घूंट दर घूंट गले से नीचे उतारते रहते हैं। कमोबेश यही स्थिति, कोतवाली, सदर बाजार, प्रेमनगर, नवाबाद इलाके का है। बावजूद जिम्मेदार अफसर बेखबर बने हुए हैं।
मौत के करीब ले जाता है हर घूंट
कच्ची शराब को अधिक नशीली बनाने के चक्कर में ये जहरीली हो जाती है। सामान्यत: इसे बनाने में गुड़, शीरा से लहन तैयार किया जाता है। लहन को मिट्टी में गाड़ दिया जाता है। इसमें यूरिया और बेशरम बेल की पत्तियां डाली जाती हैं। अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सीटोसिन तक मिला दिया जाता है। इस शराब को बनाने का कोई मानक नहीं होता है। बिना जांच किए यह शराब लोगों को बेच दी जाती है। कच्ची शराब की तीव्रता कम करने के लिए इसमें पानी मिलाया जाता है।
कच्ची शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे केमिकल मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोहल बन जाता है। मिथाइल शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन तेज होता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। इसकी वजह से कई बार तुरंत मौत हो जाती है।
डॉ. जकी सिद्दीकी, असिस्टेंट प्रोफेसर, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज
जहरीली शराब ने कई सुहागिनों का उजाड़ दिया सिंदूर
- तीन साल के भीतर गांव में 20 से अधिक लोग गवां चुके जान, जिले में 65 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत
- शराब के लती होने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग
- ग्रामीण बोले, पुलिस रोज अपना हिसाब कर चली जाती
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिले में कच्ची शराब के कारोबार ने कई घरों को उजाड़ दिया। थाना सीपरी बाजार इलाके के प्रीतमपुर गांव के लोग कच्ची शराब की कहानी सुनाकर सिहर उठे। गांव में तीन साल के अंदर करीब बीस लोग कच्ची शराब पीने से मौत का शिकार बन चुके हैं। जबकि जिले में कुल 65 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। शराब के लती होने से गांव में लोग कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इनका दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।
इस गांव में अधिकतर युवाओं को कच्ची शराब ने अपनी आगोश में लेकर मौत की नींद सुला दिया। सुहागिनों का सिंदूर उजड़ जाने से कई घर बर्बाद हो गए। नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि साहब यहां तो पूरे दिन खेतों में शराब बिकती है। पुलिस रोज आती है और अपना हिसाब-किताब कर चली जाती है। उन्होंने बताया कि गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्ग लती हो चुके हैं। आलम यह है कि वह मजदूरी करने के बाद सीधे घर न आकर कच्ची शराब पीकर खेतों में लेट जाते हैं। रात में घर वाले उठाकर घरों में लाते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। जिले भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 65 से अधिक लोगों की कच्ची शराब पीने से मौत हो चुकी है। साथ ही लंबे समय तक कच्ची शराब के सेवन से किडनी, लीवर, फेफड़े व आंखों के रोगों की समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं।
नंबर 1
प्रीतमपुर गांव के रहने वाले मुन्नालाल ने बताया कि उनका 25 वर्षीय भाई अमर सिंह भी कच्च्ची शराब का लती हो गया था। धीरे-धीरे उसे बीमारियों ने जकड़ा। हालत बिगड़ने पर खूब इलाज चला, लेकिन एक साल पहले उसकी मौत हो गई। पूरा परिवार अब भी इस सदमे से नहीं उबर सका।
नंबर 2
मनोज नेे बताया कि उसके 60 वर्षीय दादा लाड़ले भी कच्ची शराब के आदी हो गए थे। उन्होंने सालों कच्ची शराब पी। उनकी हालत बिगड़ती गई। इसके बाद दो साल पहले उनकी मौत हो गई। पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन आज तक कच्ची शराब का कारोबार बंद नहीं हो सका।
नंबर 3
सचिन ने बताया कि उसके पिता कालीचरण मकान बनाने के ठेके लेते थे। मजदूरों के साथ वह इलाके में बिकने वाली कच्ची शराब के लती हो गए थे। काम धंधा छोड़कर वह सुबह से खेतों पर पहुंचकर शराब पीते थे। दो साल पहले उनकी भी शराब पीने से मौत हो गई।
नंबर 4
गीता बताती हैं कि उनके देवर हजारी भी खूब कच्ची शराब पीते थे। दो साल पहले शराब के नशेे में वह पटरी पार कर गांव की तरफ आ रहे थे, तभी ट्रेन की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई थी। वह बेलदारी करते थे। उनकी मौत के बाद से पूरा परिवार बिखर गया था।
नंबर 5
क्रांति बताती हैं कि उनके पति बनमाली की कच्ची शराब पीने से एक साल पहले मौत हो चुकी है। उनके दो बच्चे हैं। उनकी मौत से पूरा परिवार बिखर गया। रोजीरोटी का संकट भी खड़ा हो गया। वह दिव्यांग हैं। घर चलाने में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस टीम के साथ आबकारी विभाग मिलकर लगातार दबिश दे रहा है। प्रतिदिन दोनों की संयुक्त टीमें कार्रवाई कर रही हैं। अवैध कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। कुछ अवैध कारोबारी चोरी-छिपे कारोबार कर रहे हैं। उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। टीमें भी गठित कर दी गई हैं।
प्रमोद गोयल, आबकारी अधिकारी
जिले की पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। प्रतिदिन कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बार-बार पकड़े जाने वाले अवैध कारोबारियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। पिछले सप्ताह भी पुलिस कई लोगों पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई कर जेल भेज चुकी है। अवैध काम नहीं होने दिया जाएगा। कार्रवाई लगातार जारी है।
राहुल मिठास, प्रभारी एसएसपी