झांसी। पराली जलाने पर काबू पाने में नाकाम प्रशासनिक अफसरों ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए सिर्फ किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने शुरू कर दिए हैं। खेत में पराली जलाने के आरोप में मंगलवार को मोंठ थाने में तहसीलदार डॉ. लालकृष्ण ने 27 किसानों के खिलाफ प्रदूषण फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया। अब तक डेढ़ सौ से अधिक किसानों के खिलाफ पराली जलाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी।
पराली जलाने पर रोकथाम के लिए एनजीटी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं। पिछले कई माह से अफसर लगातार रणनीति तैयार कर रहे हैं लेकिन, जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति का कोई असर होता नहीं दिखता। फसल कटाई के बाद से पराली जलने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा। इन पर प्रशासनिक अफसर अकुंश नहीं लगा पा रहे। अब नाकामी का ठीकरा सिर्फ किसानों के सिर पर फोड़ा जा रहा है। पिछले दो दिन में ही किसानों के खिलाफ सिर्फ मोंठ इलाके में अस्सी एफआईआर दर्ज हो चुकी जबकि इसके पहले 46 किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। इन किसानों से करीब सवा लाख रुपये जुर्माना भी वसूला गया है।
अफसरों की नहीं तय हो रही जवाबदेही
पराली जलाने के आरोप में निशाना सिर्फ किसानों को ही बनाया जा रहा जबकि एनजीटी ने प्रशासनिक जवाबदेही भी तय करने की बात कही थी। शासन स्तर पर भी पराली जलने पर संबंधित लेखपाल, तहसीलदार के खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन, सौ से अधिक किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ अब तक कार्रवाई न होने से प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सेटेलाइट रिर्पोटिंग का फायदा नहीं
पराली जलाने की निगरानी सेटेलाइट से की जा रही है। इसके किराए पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन, इसके बावजूद पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। पिछले वर्ष जिन इलाकों में सर्वाधिक पराली जलाए जाने के मामले सामने आए थे वहीं, इस बार भी पराली जलाई जा रही है। इसे रोक पाने में नाकाम अफसर इसे कूड़ा जलने से पैदा हो रहा धुआं बता रहे हैं।