झांसी। आम जनता के साथ-साथ पुलिस वाले भी लाइसेंसी असलहों के शौकीन है। जिले मेें 224 पुलिसकर्मियों ने पिस्टल व रिवाल्वर के लाइसेंस ले रखे हैं। वह अपने साथ सरकारी व प्राइवेट असलहा लेकर चलते हैं। इसके पीछे शौक बताया गया है। हालांकि, दोनों को साथ लेकर चलने में सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं।
जनता की सुरक्षा व विषम परिस्थितियों से निपटने के पुलिस में तैनात इंस्पेेक्टर व दरोगाओं को महकमे की तरफ से रिवाल्वर व पिस्टल दी जाती है। हालांकि, सिपाहियों को असलहा नहीं दिया जाता है। ऐसे में कई इंस्पेक्टर व दरोगाओं ने सरकारी असलहा होने के बाद भी लाइसेंस बनवाकर पिस्टल व रिवाल्वर ले रखी है।
उनका कहना है कि शौक के लिए असलहा लिया है। अधिकांश पुलिसवाले सरकारी असलहा साथ रखते हैं, जबकि प्राइवेट को घर पर रखते हैं। उनको कभी-कभार ही उपयोग करते हैं। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना है कि वह दोनाें असलहा साथ रखते हैं। एक साथ दो असलहा रखने का शौक पूरा कर रहे हैं। एक साथ दो-दो असलहा लेकर चलने में कई सावधानियां भी बरतते हैं। उनको उपयोग से लेकर रखने का पूरा ध्यान रखा जाता है।
35 से 40 साल के पुलिसकर्मी
असलहा रखने के लिए शौकीन युवा पुलिसकर्मी ज्यादा है। इनमें असलहा रखने वाले अधिकांश पुलिसकर्मियों की उम्र 35 से 40 के बीच है। कुछ अन्य पुलिसकर्मियों ने भी लाइसेंस के लिए आवेदन कर रखे हैं। जिले में वर्तमान में 2700 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें 224 पुलिसकर्मियाें ने ही लाइसेंस बनवाकर असलहा ले रखा है।
पुलिस में इनको असलाह लेने की पावर
पुलिस विभाग में सरकारी असलहा कौन ले सकता है और कौन नहीं। इसके लिए मानक निर्धारित हैं। सिपाही को जरूरत के वक्त असलहा दिया जाता है। इसी तरह दरोगा व इंस्पेक्टर भी रिवाल्वर और पिस्टल ले सकते हैं। कार्बाइन कांस्टेबल को भी अलॉट होती है। खास तौर पर उस परिस्थिति में जब उसे किसी वीआईपी की सुरक्षा में लगाया जाता है। इसके अलावा एके 47 जैसा आधुनिक असलहा अधिकारियों की सुरक्षा में लगे सिपाहियों को दिया जाता है।
इंस्पेक्टर व दरोगाओं को सरकारी असलहा दिया जाता है। ऐसे में प्राइवेट असलहा लेना उनका निजी मामला है।
विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी