कैंसर बीमारी से संबंधित एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ग्लोबोकैन- 2018 की रिपोर्ट के अनुसार अपने देश की महिलाओं में स्तन और बच्चेदानी के साथ ही मुंह के कैंसर पीड़ित सर्वाधिक हैं। आंकड़ों के आधार पर लगभग 14 प्रतिशत स्तन कैंसर और लगभग आठ प्रतिशत बच्चेदानी कैंसर से मौतें हो रहीं हैं। मेडिकल कालेज, झांसी में हर साल 1200 नए रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से चार सौ की कीमोथैरेपी कराई जाती है।
जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. वसुधा अग्रवाल बताती हैं कि 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र की सभी महिलाओं को पांच वर्ष में कम से कम एक बार जांच अवश्य करानी चाहिए। ताकि, प्रारंभिक अवस्था में ही समय पर बीमारी की जानकारी हो सके। उन्होंने बताया कि महिलाओं में सबसे ज्यादा कैंसर स्तन या बच्चेदानी में पाया जाता है। बच्चेदानी में बढ़ने वाली इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
इनमें कम उम्र में शादी, कम उम्र में बच्चे को जन्म देना, असुरक्षित यौन संबंध, गर्भावस्था या प्रसव की संख्या अधिक होना तथा धूम्रपान हैं। वहीं, स्तन कैंसर के कारणों में पहला बच्चा अधिक उम्र में होना, ऐसी महिलाएं जिन्होंने अपने बच्चे को कम स्तनपान कराया हो या बिलकुल भी नहीं कराया हो, अधिक वजन होना, शराब और तंबाकू का सेवन, ज्यादा उम्र में माहवारी बंद होना आदि हैं।
हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में देश में लगभग 11.57 लाख नए कैंसर के मरीज पाए गए हैं। वहीं, पिछले पांच वर्षों में लगभग 7.84 लाख लोग कैंसर बीमारी से काल के गाल में समा गए। वर्तमान में लगभग 22.58 लाख लोग कैंसर जैसी घातक बीमारी से पीड़ित हैं। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि भारत में सर्वाधिक होने वाले कैंसर तीन प्रकार के हैं। इसमें मुंह, बच्चेदानी और स्तन का कैंसर प्रमुख है। यह भारत में होने वाले सभी प्रकार के कैंसर का 34 प्रतिशत हिस्सा है।
हर साल 1200 नए रोगी
मेडिकल कॉलेज के कैंसर डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशुल गोयल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में हर साल 1200 नए रोगी अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें से हर साल 400 रोगियों की कीमोथैरेपी कराई जाती है।
कैंसर से सर्वाधिक मौतें
जनपद के तंबाकू उन्मूलन केंद्र, जिला अस्पताल के मनोवैज्ञानिक पंकज तिवारी का कहना है कि सभी प्रकार के कैंसर में तंबाकू की भूमिका अहम है। तंबाकू का सेवन करने वाले 95 प्रतिशत लोगों में मुंह का कैंसर होता है। इसी तरह अपने देश में कैंसर से मरने वालों में 40 प्रतिशत मौत तंबाकू के प्रयोग के कारण होती हैं। लगभग आठ लाख भारतीय प्रतिवर्ष तंबाकू सेवन से मरते हैं। यह संख्या क्षय रोग, एड्स, मलेरिया के कारण मरने वाले कुल लोगों से कहीं अधिक है।
तंबाकू के धुएं के नुकसान
तंबाकू के धुएं से लगभग चार हजार रासायनिक तत्व व दो सौ ज्ञात विष व 60 कैंसर पैदा करने वाले तत्व होते है। इसमें कुछ निकोटिन, तंबाकू टार, कार्बन मोनोक्साइड, आर्सेनिक, नेप्थिलीन, अमोनिया आदि है। तंबाकू सिर्फ गले नहीं बल्कि विभिन्न अंगों जैसे फेफड़े, होंठ, जीभ, मुंह, गला, स्वर नली, गर्भाशय, मूत्राशय और पैनक्रियाज़ आदि में कैंसर का मुख्य कारण है।
‘मैं हूँ और मैं करूंगा’
हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य रहता है। हर वर्ष इसका थीम भी बदल जाता है। इस साल कैंसर दिवस की थीम ‘मैं हूँ और मैं करूंगा’ रखा गया है।