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कोर्ट- चार हत्यारों को आजीवन कारावास-City

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चार हत्यारों को आजीवन कारावास
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- जमीन के बंटवारे में उतार दिया था मौत के घाट
चारों पर दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट संजय कुमार मलिक की अदालत ने हत्या का दोष सिद्ध होने पर चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चारों पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। आरोपियों ने बंटवारे के विवाद में हत्या की थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रवि प्रकाश गोस्वामी के अनुसार ग्राम सिजारी बुजुर्ग निवासी हाकिम सिंह ने थाना लहचूरा में तहरीर देते हुए बताया था कि करन सिंह सहित वह चार भाई थे। सबसे छोटा तिलक सिंह गलत संगत में पड़ गया था। इस कारण बड़े भाई ने तिलक सिंह की जमीन बांटकर उसे अलग कर दिया था। तिलक सिंह की सोहबत गलत होने के कारण वह खेती नहीं करता था। सारी जमीन खाली पड़ी रहती थी। भाईयों के साथ रहने पर सामूहिक खेती होने के कारण गुजारा आसानी हो जाता था, लेकिन जमीन का बंटवारा किए जाने पर वह बड़े भाई करन सिंह से नाराज हो गया था। 28 नवंबर 2005 की रात करन सिंह के साथ हाकिम सिंह उसका लड़का नरेंद्र सिंह व पत्नी पार्वती खेतों में पानी लगाने के लिए गए थे। यहां से वापस लौटते समय करन सिंह सभी लोगों से आगे चल रहा था। रास्ते में छोटा भाई तिलक सिंह जो कि हाथ में कुल्हाड़ी लिए था। उसका साला राजेन्द्र पुत्र कुंदन सिंह निवासी ग्राम धौर्रा, गांव के ही जगदीश यादव व सज्जन यादव पुत्रगण कड़ोरे यादव जो कि लाठी लिए छिपे थे। इन्होंने करन सिंह को पकड़कर गिरा लिया और कुल्हाड़ी व लाठियों से हमला कर दिया। करन सिंह के सिर में कुल्हाड़ी व लाठियाें से घातक वार कर सभी लोग भाग गए।
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तहरीर में बताया कि हदबंदी कराने में करीब एक एकड़ भूमि जगदीश व सज्जन यादव के खेत से निकल गई थी, जिसका मुकदमा चलने के कारण रंजिशन दोनों ने तिलक सिंह व राजेंद्र के साथ मिलकर करन सिंह की हत्या कर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने चारों अभियुक्ता के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए थे। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्ति तिलक सिंह, राजेंद्र सिंह, जगदीश यादव व सज्जन सिंह यादव को धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड, जुर्माने की राशि में से पचास प्रतिशत मृतक करन सिंह की पत्नी को प्रदान की जाएगी। अभियोजन की ओर से पैरवी अभियोजन अधिकारी एमपी सिंह व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी आरपी कैथल ने भी की।
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