स्वकर लागू कर पाने में फिसड्डी नगर पालिका
सर्वे कंपनी की लापरवाही की मार झेलेंगे मकान मालिक
कई सालों का एक साथ भुगतान करना होगा स्वकर, नगर पालिका परिषद के अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नगर पालिका परिषद स्वकर निर्धारण करने के मामले में फिसड्डी साबित हो रही है। जिस संस्था को सर्वे रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है, उसने अभी तक इसे पूरा नहीं किया है। इससे मकान मालिकों पर अतिरिक्त भार पड़ना तय माना जा रहा है।
नगर पालिका परिषद मकानों से कर वसूलने के पुराने ढांचे को बदलने के उद्देश्य से स्वकर प्रणाली लेकर आई है। पालिका ने मकानों व प्लाटों के सर्वे का काम अलीगढ़ की एक संस्था को सौंपा है। इस संस्था ने वर्ष 2015 में सर्वे का काम प्रारंभ किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। हालांकि सर्वे में मकानों की संख्या में जरूर बढ़ोत्तरी हो गई है। पहले 23 हजार आठ सौ 70 मकान चिह्नित थे। नये सर्वे में संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है। इसका सत्यापन का काम चल रहा है। इस दौरान तमाम खामियां निकल रही हैं। कहीं जगह तो वार्ड ही बदल गए हैं। कर अधीक्षक हेमंत सिंह का कहना है कि सर्वे के सत्यापन का काम पूरा होने के बाद उसे साफ्टवेयर पर फीड किया जाएगा। इसके उपरांत कंपनी डिमांड निकालेगी। इसके आधार पर स्वकर तय किया जाएगा। वैसे ही प्रणाली में मकान एवं प्लाट मालिक को स्वकर भरकर देना होगा। इसमें सड़क की चौड़ाई व मकान की बनावट को ध्यान में रखकर टैक्स तय किया जाता है। हर पांच साल में कर निर्धारण करना होता है। जिसे ध्यान में रखकर स्वकर निर्धारण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वर्ष 2020-21 में पुन कर निर्धारण किया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर पालिका परिषद ने स्वकर को लागू करने के लिए लाखों रुपये से सर्वे कराया है। वित्तीय वर्ष 2017 के दो माह गुजर गए हैं और अभी तक इसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। यदि इसे वर्ष 2018 में लागू किया गया तो यह दो साल तक चल पाएगा। वर्ष 2021 में नए सिरे से कर का निर्धारण होगा। इसमें पालिका को दोबारा लाखों रुपये खर्च करने होंगे। इतना ही नहीं, स्वकर को लागू करने में हो रही देरी का सीधा असर मकान और प्लाट मालिकों पर पड़ रहा है। मकान मालिकों को वर्ष 2015 से ही स्वकर देना होगा। इस तरह दो या तीन साल का स्वकर जमा करना निर्धन परिवारों के लिए आसान नहीं होगा। इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं।
ये होता था कर का निर्धारण
वर्ष 2009-10 में नगर पालिका पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर कर निर्धारण की सुनवाई करती थी। इसमें भेदभाव की स्थिति बनी रहती थी। इसके मद्देनजर अब स्वकर की व्यवस्था लाई गई।