बीयू की फर्जी अंकतालिका पर कर रहा नौकरी
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी अंकतालिका के आधार पर एक युवक बिहार में नौकरी करता रहा। इस दौरान अंकतालिका खोने पर वह दूसरी प्रति निकलवाने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय आया तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। खास बात यह है कि पूर्व में युवक ने जन सूचना के तहत विश्वविद्यालय से सूचना मांगी तो अंकतालिका को सही बताया गया था। मामले की जानकारी होने पर कुलपति ने जांच के आदेश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को बिहार से आया एक युवक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में दूसरी अंकतालिका बनवाने के लिए पहुंचा। आवेदन पत्र के आधार पर नाम और रोल नंबर का गोपनीय और परीक्षा विभाग में रिकार्ड खंगाला गया। संबंधित नाम और नंबर से कोई रिकार्ड नहीं पाया गया। इस पर युवक से पूछताछ की गई तो उसने जनसूचना का हवाला देते हुए बताया कि बुंविवि इस मामले में अंकतालिका को सही बता चुका है। इस पर यह मामला कुलपति तक पहुंचा।
कुलपति ने युवक से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह हाल में सरकारी नौकरी कर रहा है तथा उसने बिहार में ही एक युवक से 60 हजार रुपये में अंकतालिका ली थी। नौकरी का पदभार संभालने से पहले जन सूचना से उसने जानकारी भी मांगी। अंकतालिका को सही दर्शाया गया था।
बीयू में चल रहा फर्जीवाड़ा
जनसूचना विभाग की ओर से मांगी गई जानकारी में फर्जी अंकतालिका को सही दर्शाने से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कठघरे में है। इससे पहले भी यहां की कई अंकतालिकाएं फर्जी पाई जा चुकी हैं।
आज होगी फोरेंसिक जांच
गजन सूचना में दी गई गलत जानकारी के मामले को कुलपति ने गंभीरता से लेने के बाद शुक्रवार को कर्मचारियों को बुलाकर डिस्पेच नंबर लिखने और उसकी फोरेंसिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। यदि, जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई बीयू प्रशासन की ओर से की जाएगी।