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बरसात नहीं हुई, बुआई लेट-City

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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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झांसी और ललितपुर पर मेघ नहीं मेहरबान
सब हेड: बुंदेलखंड में अब तक सर्वाधिक बरसात चित्रकूट में
क्रासर
- पानी नहीं बरसने से खरीफ की फसल की बुआई हो रही लेट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जुलाई के दस दिन निकल गए, लेकिन अब तक बरसात ने झांसी और ललितपुर पर झूमकर मेहरबानी नहीं की है। स्थिति यह है कि झांसी में जहां 132 मिलीमीटर बरसात हुई है, वहीं ललितपुर में अब तक सिर्फ 55 मिलीमीटर बरसात हुई है। जबकि चित्रकूट में 358 मिलीमीटर पानी बरस चुका है। ऐसे में खरीफ फसलों की बुआई में देरी हो रही है। जिन फसलों की पहले बुआई हो गई थी, वह कुम्हलाने लगी हैं।
बुंदेलखंड की त्रासदी है कि हर दो-तीन साल के बाद यहां सूखा पड़ जाता है। जहां 2015-16 में 500.30 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, वहीं 2016-17 में 561.17 मिलीमीटर बरसात हुई। मौसम वैज्ञानिकों ने 2017-18 में बेहतर मानसून की उम्मीद जताई थी। इससे लग रहा था कि इस बार बुंदेलखंडवासियों को सूखा नहीं झेलना पड़ेगा। जुलाई के दस दिन बीत गए और जिस हिसाब से पानी बरस रहा है, उससे कृषि विभाग के अफसरों के माथे पर चिंता की लकीरें छाने लगी हैं। किसान पानी बरसने की उम्मीद में बुआई नहीं कर रहा है। जिन किसानों ने उर्द, मूंग और ज्वार की बुआई कर दी है, वह फसलें भी कुम्हलाने लगी हैं।
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जुलाई के दस दिन बीत जाने के बाद भी अकेले झांसी में ही नहीं, बल्कि ललितपुर, उरई, महोबा समेत बुंदेलखंड के सभी जिलों की यही स्थिति है कि बहुत कम पानी बरस रहा है। अकेले चित्रकूट ऐसा जिला है, जहां पानी ठीक बरस रहा है और अब तक 358 मिलीमीटर बरसात हो गई है।

बुंदेलखंड में अब तक हुई वर्षा
झांसी- 132 मिलीमीटर
ललितपुर- 55 मिलीमीटर
जालौन -97 मिलीमीटर
बांदा-237 मिलीमीटर
चित्रकूट-358 मिलीमीटर
हमीरपुर- 60 मिलीमीटर
महोबा- 44 मिलीमीटर

इन फसलों की बुआई नहीं हो रही
पानी नहीं बरसने के कारण तिल, उर्द, मूंग और धान की बुआई लेट हो गई है। इक्का-दुक्का किसानों ने यदि बुआई कर भी दी है तो उनकी फसल कुम्हला रही है। वह पानी बरसने का इंतजार कर रहे हैं।

झमाझम नहीं हो रही बरसात
बुंदेलखंड में जुलाई और अगस्त के महीने में ही झमाझम बरसात होती है। इन्हीं दो महीनों में पूरी बरसात हो जाती है, लेकिन दस दिन बीतने के बाद भी अब तक झमाझम बरसात नहीं हुई है। पानी बरस रहा है, लेकिन कहीं बूंदाबांदी करके निकल जाता है तो कहीं दस से पंद्रह मिनट तक बरसने के बाद आसमान साफ हो जाता है।

जुलाई में औसत वर्षा
जिला में जुलाई में औसत वर्षा 296.40 मिलीमीटर होती है। 2015-16 में 246.40 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि 2014-15 में 154.29 मिलीमीटर पानी बरसा था। 2013-14 में जरूर 328.78 मिलीमीटर पानी बरसा था। जिला में साल भर में औसत वर्षा 879.10 मिलीमीटर होती है।

राजघाट व माताटीला बांध खाली
भोपाल में पानी कम बरसने के कारण अभी तक बेतवा नदी में भरपूर पानी नहीं आया है, जिससे राजघाट व माताटीला बांध लगभग खाली हैं। राजघाट बांध जहां 15 मीटर खाली है, वहीं माताटीला बांध साढ़े सात मीटर खाली है। झांसी शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए बांधों में पानी होना बहुत जरूरी है।

इंतजार कीजिए, पानी बरसेगा
इस सप्ताह बुंदेलखंड में मानसून कमजोर रहा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अब मानसून रफ्तार पकड़ेगा। इसके लिए इंतजार किया जा सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पानी बरसेगा।
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- डा. मुकेश चंद्र
मौसम वैज्ञानिक

बुआई में देरी हो रही
किसानों ने बुआई शुरू कर दी थी, लेकिन पानी कम बरसने के कारण बुआई की गति धीमी हो गई है। अभी तिल, की बुआई नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि दो से तीन दिन में पानी बरसेगा और बुआई शुरू हो जाएगी।
- डा. बीआर मौर्य
जिला कृषि अधिकारी
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