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स्मार्ट सिटी-1-Lalitpur

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अंब्रेला हेडिंग:
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‘स्मार्ट’ होगी अपनी ‘सिटी’, आखिरी बाधा हटी
कॉमन इंट्रो:
दो बार चूकने के बाद आखिरकार अपना झांसी भी स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल हो ही गया। अब इसका विकास तेजी से किया जाएगा। सुखद संयोग यह है कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार है। जाहिर है पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। बुंदेलखंड सरकार की प्राथमिकता में है। इसका लाभ भी झांसी को मिलेगा। अब झांसी के विकास पर एक हजार करोड़ रुपये आने वाले पांच साल में खर्च होंगे। झांसी को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल कराने में अफसरों के साथ नागरिकों की भी भूमिका रही है। अब चुनौती अपने आचरण से स्मार्ट दिखने की होगी।

पांच साल में खर्च होंगे एक हजार करोड़
सब हेड: हर प्रकार की सुविधाएं मिलेंगी शहर वासियों को
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शुक्रवार को स्मार्ट सिटी में शामिल होने की घोषणा के बाद से शहर के विकास की तस्वीर साफ हो गई है। आने वाले पांच साल में एक हजार करोड़ रुपये खर्च करके शहर वासियों को हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। शहर के स्मार्ट होने के बाद यहां न तो ट्रैफिक जाम की समस्या होगी और न ही बिजली और पानी की।
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शहर के स्मार्ट बनने के बाद बेघरों को आवास की सुविधा मिलेगी। शहर खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा। सभी सड़कों पर फुटपाथ बनेंगे। टूरिस्ट इंफारमेशन कियोस्क लगेंगे, जो रात में भी रोशन रहेंगे। फुट ओवरब्रिज और आटोमेटिक स्मार्ट ट्रैफिक सिगनल लगेंगे। सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी के विकास के लिए पांच साल खर्च होने वाले एक हजार करोड़ रुपये में से केंद्र सरकार 465 करोड़ रुपये खर्च करेगी, राज्य सरकार 500 करोड़ रुपये देगी और बाकी पैसा नगर निगम लगाएगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा काम
झांसी। सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम होगा। इस पर स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड काम करेगी, जिसके अध्यक्ष मंडलायुक्त तथा सीईओ नगर आयुक्त होंगे। जल्द ही केंद्र सरकार से कंपनी आएगी और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी। उसी के हिसाब से काम होगा। झांसी को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए चार विकल्प दिए गए थे। इसमें से एक है एरिया बेस्ड डेवलपमेंट, दूसरा पेन सिटी प्रपोजल, तीसरा ग्रीन सिटी और चौथा री-डेवलपमेंट। इन चारों में से दो के चयन करने का विकल्प दिया गया था, जिसमें से झांसी ने एरिया बेस्ड डेवलपमेंट और पेन सिटी प्रपोजल का चयन किया था। इसी आधार पर प्लानिंग बनाई गई और उसे मंजूरी दे दी गई है।

एक छत के नीचे सभी सुविधाएं
शहरवासियों को बिजली के बिल, पानी के बिल, जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने अथवा बिल का पैसा जमा करने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। आईसीटी टेक्नालाजी के अंतर्गत सभी विभाग कंप्यूटर से ऑनलाइन जुड़ जाएंगे। यदि किसी व्यक्ति को किसी विभाग से कोई काम है तो वह ऑनलाइन या कॉमन कार्यालय में आकर अपनी समस्या का समाधान करा सकता है।

जानिए पेनसिटी के लाभ
स्मार्ट सिटी योजना में पेनसिटी प्रमुख कैटेगरी है। इसके अंतर्गत ट्रैफिक कंट्रोल आता है। इसमें शहर के ट्रैफिक की योजना इस तरह तैयार की जाएगी, जिससे बिना समय खराब किए आप अपना सफर तय कर सकें। अभी इलाइट चौराहे से मेडिकल कॉलेज के बीच सात किलोमीटर के सफर में आधा से पौन घंटे का समय लग जाता है। पेनसिटी में बनने वाले प्लान के बाद आप यह दूरी दस मिनट में तय कर लेंगे। इसमें सिटी बस चलाने का भी योजना है।

एरिया बेस्ड डेवलपमेंट
दूसरी कैटेगरी एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के अंतर्गत शहर के चुनिंदा वार्ड शामिल किए गए हैं। इन वार्डों में सिविल लाइन दक्षिण भाग प्रथम, सिविल लाइन दक्षिण भाग द्वितीय, प्रेमगंज प्रथम, प्रेमगंज द्वितीय, सिविल लाइन पश्चिमी भाग, सिविल लाइन उत्तरी भाग, सीपी मिशन कंपाउंड, आजाद गंज, नानक गंज, तालपुरा प्रथम, तालपुरा द्वितीय और नंदनपुरा द्वितीय शामिल हैं। इनमें सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पार्किंग, शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी।


होर्डिंग की जगह इनोवेटिव मीडिया
सब हेड: अब बदल जाएगा प्रचारपट लगाने का अंदाज
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
स्मार्ट झांसी में होर्डिंग लगाने का अंदाज बदल जाएगा। शहर में होर्डिंग की जगह अब इनोवेटिव मीडिया (केंटीलीवर) लगाए जाएंगे। शहर में बेतरतीब लगे होर्डिंग प्रमुख समस्या है। इससे शहर की सुंदरता तो बिगड़ती ही है, साथ ही यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। बेतरतीब होर्डिंग के खिलाफ अमर उजाला लगातार अभियान चलाता रहता है।
केंटीलीवर एक मजबूत ऊंचे पिलर के सहारे खड़ा किया जाता है, इसमें ऊपर लोहे का फ्रेम कसकर उस पर प्रचारपट लगाया जाता है। जबकि, होर्डिंग में दो पिलर लगते हैं, जो अतिक्रमण का कारण बनते हैं। पिछले दिनों नगर निगम के पार्षद चंडीगढ़ में हुई कार्यशाला में हिस्सा लेने गए थे, जहां पर उन्होंने देखा था कि पूरे शहर में एक भी होर्डिंग नहीं लगा था, बल्कि इनोवेटिव मीडिया के सहारे ही विज्ञापन लगे थे। स्मार्ट सिटी योजना में शहर की सुंदरता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसी सभी चीजें हटाई जाएंगी, जो अतिक्रमण का कारण बनती हैं।

पहले चरण में ये होंगे काम
- रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के छह वार्डों में अंडरग्राउंड बिजली की केबल डाली जाएगी। नालियों और सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा।
- अंडरग्राउंड बिजली की लाइन, ड्रेनेज सिस्टम और सीवरेज ट्रीटमेंट पर 1,407करोड़ रुपये खर्च होंगे। बड़ागांव गेट बाहर मानव का ताल और लक्ष्मी ताल में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा।
- पेनसिटी में शहरवासियों को एक छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। इस पर लगभग 460 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर ट्रैफिक और सड़क में सुधार होगा।

ये होंगी सुविधाएं
- 24 घंटे पानी मिलेगा। इसके लिए 950 करोड़ रुपये की झांसी महानगर पेयजल योजना स्वीकृत हो चुकी है।
- 24 घंटे बिजली के लिए स्कॉडा योजना के अंतर्गत अंडरग्राउंड केबल डाली जा रही है। कहीं पर भी तार झूलते नहीं दिखेंगे।
- शहर में 56 मिनी बस, 86 स्टैंडर्ड बस चलेंगी। वाईफाई की सुविधायुक्त 110 बसस्टॉप और एक टर्मिनल बनेगा।
- सड़कों पर बने फुटपाथ अतिक्रमणमुक्त किए जाएंगे, ताकि किसी व्यक्ति को पैदल चलने में असुविधा न हो।
- सीपरी बाजार में सब्जी मंडी हटाकर वहां पर अंडरग्राउंड पार्किंग स्थल बनाया जाएगा। इसके ऊपर सब्जी मार्केट और सबसे ऊपर मार्केट बनेगा।
- अंतर्राज्यीय बस स्टेंड पर मॉल बनाया जाएगा। इसके लिए जगह पहले से ही चिह्नित कर ली गई थी।
- अवैध पार्किंग का होगा समाधान। पेनसिटी प्लान के अंतर्गत वाहन पार्किंग को प्रमुखता दी गई है।
- रानी महल के पास बनेगी मल्टीलेबल कार पार्किंग, इससे सुभाष गंज बाजार में ट्रैफिक जाम की समस्या हल होगी।
- 3,645 सोडियम लाइट को एलईडी में बदला जाएगा
- 1,140 सोलर लाइट लगाई जाएंगी
- 211 सरकारी भवनों में सोलर पैनल लगेंगे
- 13 आंगनबाड़ी, 14 प्राइमरी, दो हायर सेकेंड्री स्कूल और पांच पीएचसी का विकास
- महिला थाना अपग्रेड होगा
- पुलिस को भी स्मार्ट बनाया जाएगा
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया जाएगा
- कचरा घर समाप्त होंगे
- डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन होगा

कोट --
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फोटो- हाफ कालम
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झांसीवासियों के योगदान से मिली सफलता
शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने में शहरवासियों को योगदान सर्वाधिक रहा है। लगातार किए गए प्रयास काम आए और शहर को स्मार्ट बनाने में सफलता मिल गई। पहले जन्म- मृत्यु पंजीकरण, फिर हाउस टैक्स को ऑनलाइन किया गया। 13 श्मशान घाटों और 08 कब्रिस्तानों का कायाकल्प कराया। 28 सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय बनवाए। जनता की राय मांगी और उसके हिसाब से विकास कार्य कराने का प्रयास किया। अन्य नगर निगमों की तुलना में झांसी बहुत छोटा शहर है, लेकिन स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने से झांसी का कद बहुत बढ़ गया है।
किरन वर्मा, महापौर।

ई- गर्वनेंस लागू करेंगे
झांसी स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद अब शहर में कई तरह के विकास कार्य किए जाएंगे। ई- गर्वनेंस लागू करेंगे, स्वच्छता ऐप बनाएंगे, ताकि स्वच्छता संबंधी शिकायत सीधे मोबाइल पर आ जाए। शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी काम होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सभी के लिए आवास बनाने का काम होगा, सड़कें सही कराएंगे, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पूरी तरह लागू करेंगे। अतिक्रमण और अवैध होर्डिंग हटाएंगे।
- प्रताप सिंह भदौरिया
नगर आयुक्त

बीज हमने डाला था
शहर स्मार्ट बन गया, यह हर्ष की बात है। इसके लिए हमने बीज डाला था, लेकिन हम उसका फल नहीं खा सके। हमें खुशी है कि सफलता मिल गई।
अरुण प्रकाश
पूर्व नगर आयुक्त झांसी, अब आगरा

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आतिशबाजी की, मिठाई बांटी
झांसी। स्मार्ट सिटी की घोषणा होते ही नगर निगम कार्यालय में सभी एक- दूसरे को बधाई देने लगे। महापौर किरन वर्मा कार्यालय में थीं। सभी कर्मचारी उन्हें बधाई देने पहुंच गए। इस दौरान मिठाई बांटी गई। नगर निगम गेट पर आतिशबाजी की गई।

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सबसे पहले जुड़े थे
जिला जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी ने बताया कि उनकी संस्था सिटी को स्मार्ट बनाने के मिशन में सबसे पहले जुड़े थे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन नगर आयुक्त अरुण प्रकाश सबसे पहले यह प्रस्ताव लेकर उनके पास आए थे। तब नगरा में यह स्थिति थी कि लोग जहां मर्जी हो, वहां कचरा डाल देते थे। विरोध करने पर झगड़ा करते थे। लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया गया। अब इधर-उधर कचरा फेंकना बंद हो गया है।

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नियमों का पालन सीखें
स्मार्ट सिटी बनने के बाद हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है। व्यापारियों को चाहिए कि सड़क पर अतिक्रमण न करें। कोई भी यहां-वहां न थूके। दुकानों के सामने वाहन न खड़े कराएं। जब हम खुद स्मार्ट होंगे और नियमों का पालन करना सीखेंगे, तभी झांसी स्मार्ट होगा।
- रामतीर्थ सिंघल, व्यापारी नेता

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रखरखाव भी जरूरी
स्मार्ट सिटी बनने के बाद तमाम सुविधाएं मिलेंगी। अब यह हमारा दायित्व होगा कि हम इन सुविधाओं का रखरखाव करें। संसाधनों को नुकसान न पहुंचाएं और कोई ऐसा करे तो उसकी शिकायत करें। सबके प्रयास से विकास संभव है।
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- सुधीर सिंह, अधिवक्ता

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अब जागरूक होना पड़ेगा
लोगों को कचरा फेंकने की प्रवृत्ति बदलनी पडे़गी, क्योंकि अब डोर-टू-डोर कचरा इकट्ठा हो रहा है। स्मार्ट सिटी बन जाने के बाद मानक बदल जाएंगे। सुना तो यह भी है कि कचरा घर समाप्त हो जाएंगे। इसलिए अभी से सबको जागरूक होने की जरूरत है।
- वंदना अग्रवाल, गृहणी
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