झांसी। बुंदेलखंड के दस जिलों में 185 मालदार अफसरों के नाम सामने आए हैं। यह सभी वह अधिकारी हैं जिन्होंने कुछ ही दिनों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर ली है। बड़े शहरों में कोठियां हैं। बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं। सीबीआई, विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीमें जांच कर रही हैं। आरटीओ दफ्तर में तैनात रहे एक सिपाही और चालक के खिलाफ झांसी में मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच एजेंसियों ने कई दूसरे विभाग के अफसरों की कुंडली भी खंगालनी शुरू कर दी है। अचानक एजेंसियों की सक्रियता से अफसरों में हड़कंप मचा है।
बुंदेलखंड में शामिल मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, सागर और दमोह जिले की बात करें तो यहां 135 के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जांच चल रही है। इनमें आबकारी विभाग के अधिकारी और सिपाही भी हैं। निर्माण एजेंसियों से जुड़े इंजीनियर सर्वाधिक हैं। लोकनिर्माण विभाग, पेयजल, वन विभाग और वन विस्तार से जुड़ी योजनाओं में शामिल अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। वहीं झांसी, ललितपुर, बांदा, महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट की अगर बात करें तो यहां भी 50 अफसरों की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत शासन में हुई थी। शासन ने सभी में जांच के आदेश कर दिए हैं। इनमें बिजली, शिक्षा विभाग, इनकम टैक्स, आरटीओ आफिस, समाज कल्याण, तहसील, खनन विभाग और पुलिस से जुड़े लोग हैं। गेहूं और धान खरीद में गोलमाल भी सामने आ चुका है।
भ्रष्टाचार की जांच में दोेषी पाए जाने पर होगी बर्खास्तगी की कार्रवाई: शिवराज
झांसी। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के चार जिलों में भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के दायरे में आए 135 से अधिक अफसर और कर्मचारियों की मुख्यमंत्री शिवराज के बयान के बाद नींद उड़ी हुई है। शिवराज ने भ्रष्टाचार के मामले में तल्ख रुख अपनाते हुए कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। एमपी के सीएम ने घोषणा की है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के बारे में जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखने के साथ ही उसे सरकार की ओर एक लाख रुपये का इनाम भी दिया जाएगा।
झांसी। बुंदेलखंड पैकेज के रूप में तमाम विभागों को शासन ने बजट जारी किया। इस बजट से चेकडैम, तालाब, कूप निर्माण, वन विभाग के क्षेत्र में सड़कों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कराया गया। लेकिन अगर बुंदेलखंड में शामिल उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के जिलों की बात करें तो यहां इस पैकेज में बड़ा घोटाला हुआ है। झांसी में ही लघु सिंचाई विभाग में 50 करोड़ के टेंडर पूल कर लिए गए थे। हालांकि इस मामले में इंजीनियर सस्पेंड भी हो चुके हैं जबकि कई के खिलाफ जांच चल रही है। छतरपुर और टीकमगढ़ में भी 9 इंजीनियरों के खिलाफ जांच चल रही है। इन सभी ने कुछ ही दिनों में खासी संपत्ति अर्जित कर ली है। बड़े शहरों में कोठियां तक बना ली हैं। दिल्ली, गाजियाबाद, ग्वालियर के साथ लखनऊ तक में इनके मकानों की जानकारी विजिलेंस को मिली है। यह सभी अधिकारी बुंदेलखंड पैकेज से जुड़े रहे हैं। विजिलेंस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सिंचाई के संसाधन बढ़ाने के लिए जारी होने वाले इस पैकेज में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। 80 से ज्यादा तालाब केवल कागजों में ही खोद दिए गए थे। जांच एजेंसियों को यह तालाब हकीकत में कहीं मिले ही नहीं है। 50 ऐसे कुओं की खुदाई दर्शायी गई तो पहले से ही तैयार थे लेकिन उन पर तकरीबन एक करोड़ का खर्च दिखा दिया गया।