उम्मीद: अबकी बार गेहूं की बंपर पैदावार
झांसी। बुंदेलखंड में गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए फसल में कम से कम तीन बार सिंचाई करने की जरूरत पड़ती है, लेकिन पिछले दिनों हुई बरसात से न केवल पानी की पूर्ति हो गई, बल्कि गेहूं का दाना मजबूत और पौष्टिक होने के आसार हैं। यदि अब कोई दैवीय आपदा नहीं आई या बरसात नहीं हुई तो किसान मालामाल हो जाएंगे।
जिले में रबी सीजन वर्ष 2017-18 में गेहूं की बुवाई 1.38 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में हुई है। इसी तरह, राई और सरसों 12 हजार से अधिक हेक्टेयर, चना 74 हजार से अधिक, मटर 70 हजार से अधिक, मसूर 17 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई गई है। चूंकि, मानसून अच्छा रहने की भविष्यवाणी की गई थी, इसलिए किसानों ने दिल खोलकर बुवाई की थी। फसल पकने के नजदीक आ गई है और अब तक मानसून ने भी अच्छी मेहरबानी दिखाई है।
पिछले दिनों हुई बरसात ने किसानों की उम्मीदों को और पंख लगा दिए हैं। बरसात से गेहूं की फसल का बहुत फायदा हुआ है। क्योंकि, जो किसान किन्हीं कारणों से फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे थे, उनकी सिंचाई मुफ्त में हो गई और हजारों रुपये का डीजल खर्च बच गया। सिंचाई भी संतुलित हुई अधिक तेज हवाएं नहीं चलीं, अन्यथा फसल गिरने की उम्मीद थी। गेहूं के अलावा अन्य फसलों को भी पानी से फायदा हुआ है, केवल मसूर की वह फसल जिसमें फूल लग रहा था, उसका फूल जरूर झड़ गया। चूंकि, जिले में मसूर की पैदावार बहुत कम होती है, इसलिए इसका नुकसान अधिक नहीं होगा।