शिल्प महोत्सव में शुक्रवार की शाम बुंदेली कलाकारों व आर्यकन्या महाविद्यालय की छात्राओं के नाम रही। उन्होंने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। कलाकारों ने राई, ढिमरयाई, लमटेरा समेत कई कलाओं का प्रदर्शन किया। लांगुरिया गीत की प्रस्तुति आकर्षक रही। इनके अलावा आर्यकन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने भी आकर्षक राजस्थानी नृत्य पेश कर वाहवाही लूटी।
मुक्ताकाशी मंच पर निशांत भदौरिया बुंदेली कला संस्थान के कलाकारों ने राई, ढिमरयाई, लमटेरा समेत कई कलाओं का प्रदर्शन किया। लांगुरिया गीत ‘दो- दो जोगनी के बीच में अकेलो लांगुरिया...’ ने खूब तालियां बंटोरीं। विलियम माइकल ने भी एक से बढ़कर गाने सुनाए। उन्होंने ‘लगन-लगन तुझसे मेरी लागी लगन...’, ‘चांद तारे तोड़ लाऊं...’ समेत कई गाने सुनाकर कार्यक्रम को रंगीन बना दिया।
वहीं आर्य कन्या की छात्राओं ने ‘गोरिया रे...’ गीत पर राजस्थानी नृत्य प्रस्तुत किया। गीत समेत कई गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर प्राचार्य अंजू दत्ता, एमएम पांडेय, अजय यादव, वेद श्रीवास्तव, रामकिशन निरंजन मौजूद रहे।
बजट बना कार्यक्रम में बाधक
झांसी। झांसी शिल्प महोत्सव में मनोरंजन के लिए जिन बड़े नामों का प्रचार-प्रसार किया गया था, उनकी जगह बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने ले ली है। इसकी वजह तो कोई नहीं बता रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि अगले महीने फिर से महोत्सव को अलग रंग में शुरू किया जाएगा।
महोत्सव के पहले दिन भजन गायिका तृप्ति शाक्या ने भजन सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। अगले ही दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम सिमट गए। इसके पीछे की वजह तो कोई नहीं बता रहा है, लेकिन यदि सूत्रों की मानें तो बजट इसमें बाधक बन गया। कुछ उच्च अधिकारी आयोजन को अगले महीने फिर से कराना चाह रहे हैं। दरअसल, जिन नामचीन कलाकारों के आने की संभावना जताई गई थी, उन्होंने बहुत अधिक पैसे की डिमांड कर दी। कई जगह से सोर्स सिफारिशें भी कराई गईं, लेकिन बात नहीं बनी। दूसरे, पैसा फाइनेंस करने की दिक्कत आ गई, क्योंकि जिस घोड़े पर दांव लगाया गया था। उसने दगा दे दिया और बात बिगड़ गई।
मेला में भी कम जुटी भीड़
शिल्प मेला में शुक्रवार को भीड़ कम ही जुटी। अभी गिनी चुनी दुकानें ही वहां लग पाई हैं। अधिकांश दुकानदार अभी अपनी दुकानों को सजाने में जुटे हुए हैं। झूले जरूर लग गए हैं जिनका वहां पहुंचे लोगों ने लुत्फ उठाया।