झांसी। झांसी वालों को मई का महीना गहरा जख्म देकर गया। इस एक महीने में कई शहरवासियों ने अपनों को खो दिया। नगर निगम ने सिर्फ इसी एक महीने में 1805 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए, जो अप्रैल माह के मुकाबले करीब छह गुना अधिक रहा। मौत का यह आंकड़ा अब तक का एक रिकॉर्ड भी है। इनमें अधिकांश मौतें कोविड के चलते बताई जा रही है।
झांसी वासियों के ऊपर कोविड का प्रकोप अप्रैल माह में काल की तरह टूटा। नतीजतन, मई में मौत का खौफनाक सिलसिला शुरू हो गया। शहर के श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के लिए कतार लगने लगी। जगह न मिलने से लोगों को ग्रामीण इलाकों तक जाने को मजबूर होना पड़ा। मौत ने जो तांडव मचाया उसकी गवाही अब नगर निगम से जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्र भी दे रहे हैं।
पिछले छह माह में सर्वाधिक मृत्यु प्रमाण पत्र मई माह में निगम ने जारी किए। सामान्य तौर के मुकाबले यह करीब पांच गुना अधिक है। हैरत की बात यह कि मई में ही न्यूनतम जन्म दर भी रिकॉर्ड हुई है। निगम के आंकड़े बताते हैं कि मई माह में कुल 1805 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए है। जबकि सामान्यता निगम हर माह 350-400 मृत्यु प्रमाण पत्र ही जारी करता है। हालांकि निगम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र से यह साफ नहीं हो रहा कि इनमें से कोविड से कितनी मौत हुई। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भरे जाने वाले आवेदन पत्र में परिजन को सिर्फ मौत का स्थान दर्ज करना होता है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से पहले नगर निगम का सफाई निरीक्षक आवेदक के घर जाकर सिर्फ मौत की ही पुष्टि करते हैं। इसी आधार पर उनको मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं। उसमें मौत की वजह दर्ज नहीं होती। ऐसे में कोविड से मरने वालों का सटीक अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। लेकिन एक माह की संख्या में आए पांच गुना उछाल से साफ मालूम चलता है कि कोरोना संक्रमण ने ही यह कहर बरपाया है। इन सबके बीच यह तथ्य भी हैरतअंगेज है कि इसी एक माह के दौरान झांसी में सबसे कम जन्म प्रमाण पत्र निर्गत हुए। सामान्य तौर पर 1200-1500 जन्म प्रमाण पत्र हर माह निर्गत होते हैं। लेकिन मई माह में महज 128 प्रमाण पत्र निर्गत किए गए।
माहवार जन्म एवं मृत्यु का आंकड़ा
माह जन्म मृत्यु
जनवरी 1277 455
फरवरी 1535 390
मार्च 1543 361
अप्रैल 1235 284
मई 128 1805