- केंद्र और राज्य सरकारी की कई योजना व कार्यक्रमों के बावजूद घट नहीं रहा मौत का आंकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्भवती महिलाओं के इलाज और उनकी देखरेख के लिए केंद्र व राज्य सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं। गांव-गांव एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं के सक्रिय होने का दावा है। उनकी नियमित जांच भी कराई जाती है, फिर भी गर्भवती महिलाओं की मौत का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। एक अप्रैल से अब तक 18 गर्भवतियों की मौत हो चुकी है, जिनमें नौ झांसी की हैं।
पीएम मातृत्व वंदन योजना, जननी सुरक्षा योजना, जननी-शिशु सुरक्षा योजना समेत कई कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं के लिए चल रहे हैं। इन योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जाता है। समय-समय पर उनकी जांच होती है और दवाएं दी जाती हैं। अल्ट्रासाउंड भी कराया जाता है। इन योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन के लिए गांव-गांव एएनएम और आशा कार्यकर्ता तैनात हैं, जो समय-समय पर जांच कराती हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2023-24 में 32 गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। वहीं, एक जुलाई से अब तक 18 गर्भवती मर चुकी हैं।
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मैटरनल डेथ रिव्यू कमेटी आज पांच मामलों पर करेगी मंथन
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय की अध्यक्षता में मंगलवार को मैटरनल डेथ रिव्यू कमेटी की बैठक होगी, जिसमें पांच गर्भवती महिलाओं की मौत की वजह पर मंथन किया जाएगा। इसके लिए संबंधित गांवों की एएनएम, आशा कार्यकर्ता और शहर के एक नर्सिंगहोम के डॉक्टर को भी बुलाया गया है। मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष की जगह डॉ. दिव्या जैन, आरसीआरआई के डॉ. एनके जैन, सभी सीएचसी के मेडिकल अधीक्षक, डॉ. विजयश्री शुक्ला आदि भाग लेंगी।
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18 गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है, जिनकी वजह जानने के लिए मैटरनल डेथ रिव्यू कमेटी की बैठक मंगलवार को होगी। गर्भवती महिला के पंजीकरण से लेकर समय-समय पर हुई जांच और दवाओं पर चर्चा होगी। यह पता किया जाएगा कि किस कमी की वजह से मौत हुई है, ताकि आगे सुधार किया जा सके।
डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ