रफ्तार पकड़ेगा नई पेयजल पाइपलाइन डालने का काम
झांसी।
पेयजल महायोजना के दूसरे चरण का काम जल्द ही धरातल पर उतरेगा। इस काम को करने के लिए तीन कंपनियों ने टेंडर डाले हैं। तकनीकी बिड खुल गई है। दस्तावेजों की जांच का काम शुरू हो गया है। इजराइल की भी एक कंपनी ने टेंडर डाले हैं।
पेयजल महायोजना का काम धरातल पर शुरू हो गया है। पहले चरण में महानगर के 13 जोन में टंकी और पाइपलाइन डालने का काम होना है। दूसरे चरण के काम के लिए टेंडर निकल गए हैं। तीन कंपनियों ने टेंडर डाले हैं। इसमें हैदराबाद की मेगा इंजीनियर, मुंबई की ह्यूम पाइप और इजराइल की तहल कंपनी शामिल है। जल्द ही फाइनेंशियल बिड खुलेगी और इसके बाद धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।
दूसरे चरण में शेष 16 जोन में पानी पहुंचाने के लिए माताटीला बांध से 195 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन से बबीना तक पानी लाया जाएगा। बबीना में बनने वाले नए जल शोधन संयंत्र से पानी को शुद्ध करने के बाद झांसी लाया जाएगा। माताटीला बांध पर एक सीपी टैंक, माताटीला से बबीना तक 24.50 किलोमीटर तक कच्चे पानी के लिए 1,700 मिलीमीटर व्यास की पाइप लाइन डालने के साथ ही जल शोधित पानी के लिए बबीना से झांसी तक 27.50 किलोमीटर की पाइपलाइन डाली जाएगी। 11 भूमिगत जलाशय (सीडब्लूआर), नौ टंकियां और 228 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप लाइन डाली जाएगी। यदि काम की रफ्तार ठीक रही तो 2021 तक महायोजना धरातल पर काम करने लगेगी और महानगर वासियों को पीने के पानी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
‘दूसरे चरण के काम के लिए तीन कंपनियों ने टेंडर डाले हैं। पांच मार्च को तकनीकी बिड खुल गई है। जल्द से जल्द विभागीय प्रक्रिया को पूरा कराके काम धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा।’
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता जल निगम।
इस साल भी करना होगा जलसंकट का सामना
पेयजल महायोजना के अंतर्गत माताटीला से झांसी तक नई पाइपलाइन से पानी लाने में कम से कम तीन से चार साल लग जाएंगे। चूंकि, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के आसपास क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, करगुवां, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, डॉक्टर्स, वकील कॉलोनी, कैमासन नगर, कोछाभांवर आदि में भीषण जलसंकट रहता है। इन क्षेत्रों में न तो कोई सरकारी पाइप लाइन है और न कोई दूसरा इंतजाम। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। हैंडपंप भी अधिक देर तक चलाने पर पानी उगलना बंद कर देते हैं। जलसंस्थान के टैंकरों के भरोसे लोग एक- एक दिन काटने को मजबूर रहते हैं।