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झांसी- कानपुर डबल ट्रैक पर दौड़ने लगी ट्रेनें,,,,-City

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झांसी-पारीछा डबल ट्रैक पर दौड़ने लगी ट्रेनें
- मुस्तरा, गढ़मऊ और पारीछा स्टेशन पर क्रासिंग के लिए नहीं खड़ी करनी होगी ट्रेनें
नॉन इंटरलॉकिंग का काम शनिवार को हुआ पूरा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी-पारीछा डबल ट्रैक पर नॉन इंटरलॉकिंग का काम पूरा होने के साथ ही ट्रेनों का नई लाइन पर दौड़ना शुरू हो गया है। हालांकि, अभी कुछ जगह कॉशन आर्डर लगा होने के कारण ट्रेनों को धीमी गति से दौड़ाया जा रहा है। इस ट्रैक के शुरू होने से अब झांसी की तरफ से जाने वाली ट्रेनों को आगे बढ़ाने के लिए कानपुर की तरफ से आने वाली गाड़ियों को मुस्तरा, गढ़मऊ और पारीछा स्टेशनों पर नहीं रोकना होगा।
झांसी-कानपुर डबल ट्रैक का 24 किलोमीटर हिस्सा (झांसी से पारीछा तक) बनकर तैयार है। पिछले पंद्रह दिन से इस सेक्शन में नॉन इंटरलॉकिंग का काम चल रहा था। 14 अगस्त को मुस्तरा स्टेशन और 16 अगस्त तक गढ़मऊ स्टेशन के बीच काम को पूरा कर लिया गया। 17 अगस्त को पारीछा तक यह काम पूरा होने पर शनिवार से इस ट्रैक पर ट्रेनों का दौड़ना शुरू हो गया है। हालांकि, अभी संरक्षा की दृष्टि से नए ट्रैक पर कुछ जगह कॉशन आर्डर लगाए गए हैं, जिससे ट्रेनों को इन स्थानों से धीमी गति से गुजारा रहा है। इससे पारीछा से झांसी तक की दूरी तय करने में ट्रेनों को एक घंटे से अधिक का वक्त लग रहा है। नए ट्रैक से कानपुर की तरफ से आने वाली ट्रेनों को झांसी तक लाया जा रहा है।
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कल से नियमित चलने लगेंगी ट्रेनें
नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के चलते ग्वालियर-बरौनी मेल समेत अधिकांश ट्रेनों को बदले मार्ग से गुजारा जा रहा था। यह ट्रेनें 20 अगस्त से नियमित दौड़ने लगेंगी। इनमें 11123 बरौनी- ग्वालियर मेल,11124 ग्वालियर-बरौनी मेल, 15066 पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस, 11079 लोकमान्य तिलक-लखनऊ, 12103 पुणे-लखनऊ साप्ताहिक एक्सप्रेस, 15102 मुंबई-छपरा साप्ताहिक एक्सप्रेस व 11106 झांसी- कोलकाता एक्सप्रेस शामिल है। झांसी-लखनऊ पैसेंजर, लखनऊ-झांसी, झांसी-कानपुर, और कानपुर-झांसी पैसेंजर 23 अगस्त तक निरस्त रहेंगी।

तेज हो जाएगा ट्रेनों का संचालन
झांसी से रोजाना पारीछा थर्मल पावर प्लांट में कोयले से भरी मालगाड़ियां जाती हैं। अभी सिंगल लाइन होने के कारण मालगाड़ियों को निकालते समय अन्य ट्रेनों को मुस्तरा रेलवे स्टेशन पर खड़ा करना पड़ता है। पारीछा तक डबल ट्रैक शुरू हो जाने से ट्रेनों का संचालन तेज हो जाएगा। झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को क्रॉस कराने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है। सबसे ज्यादा ट्रेनों को झांसी आने के पहले मुस्तरा स्टेशन पर रोका जाता है। यही कारण है कि कानपुर से आने वाली अधिकांश ट्रेनें समय पर झांसी नहीं आ पाती हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
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चार साल में 24 किलोमीटर ट्रैक हो सका चालू
रेल बजट 2013-14 में झांसी-कानपुर डबल ट्रैैक के लिए 817 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर और एरच रोड से ऊसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी कर रही हैं। ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। डबल ट्रैक को पूरा करने का लक्ष्य जून-2018 तय किया गया था। मगर, अभी तक 24 किलोमीटर ट्रैक ही चालू हो सका है।
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