सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के चिल्ड्रन पार्क का बुरा हाल
सब हेड --- बड़ी बड़ी झाड़ियों के बीच घूमते हैं आवारा जानवर
- रखखाव के अभाव में जाम हो गए हैं झूले
- खेलकूद के अन्य साधनों ने भी छोड़ा साथ
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में स्थित चिल्ड्रन पार्क का रखरखाव के अभाव में बुरा हाल है। यहां पटरी बिछी है, लेकिन ट्वाय ट्रेन नहीं है। बच्चों के खेलने के झूले और अन्य साधन खराब हो चुके हैं। बड़ी- बड़ी झाड़ियां उग आईं हैं, जिससे यहां खेलने के लिए आने वाले बच्चों को कीड़े- मकोड़ों के काटने का डर बना रहता है। इस कारण बच्चों ने अब इससे दूरी बना ली है।
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट बिल्डिंग के पीछे बने पार्क का उद्घाटन 27 मार्च 1994 को तत्कालीन रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष आनंद नारायण शुक्ल ने किया था। पार्क बनाने का उद्देश्य कर्मचारियों के बच्चों को मनोरंजन व खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी कार्मिक विभाग को सौंपी गई थी। लेकिन, कुछ ही समय बाद कार्मिक विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। नतीजा यह रहा कि रखरखाव के अभाव में पार्क अपनी पहचान खोने लगा। हाल यह है कि अब यह पार्क से अधिक जंगल दिखता है। यहां लगे आधा दर्जन से अधिक झूले और लोहे से बने अन्य मनोरंजन के साधन जंग खाकर जाम हो चुके हैं। फिसलपट्टियों में गड्ढे हो गए हैं। पार्क में रखा रेल का इंजन व सीमेंट से बने हाथी, जिराफ आदि बदरंग हो गए हैं।
हालांकि, तत्कालीन डीआरएम नवीन चोपड़ा की पत्नी और उत्तर मध्य रेलवे महिला समाज सेवा समिति की अध्यक्ष शिखा चोपड़ा ने पार्क को दोबारा सुंदर बनाने का कार्य कराया और एक मई 2104 को उद्घाटन किया था। लेकिन, डीआरएम का स्थानांतरण होते ही पार्क फिर से उपेक्षित हो गया। तब से पार्क का बुरा हाल है।
उधर, रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखेंगे।
ट्वॉय ट्रेन चलाने की थी योजना
जनवरी माह में हर वर्ष ग्वालियर में लगने वाले मेले में रेलवे की ट्वॉय ट्रेन आकर्षण का केेंद्र रहती है। मेले के बाद पूरी ट्रेन ग्वालियर शेड में रखी रहती है। रेल प्रशासन ने योजना तैयार की थी कि ग्वालियर मेले के उपरांत गर्मियों की छुट्टियों व अन्य अवसरों पर यह ट्रेन झांसी में बने पार्क में दौड़ाई जाएगी, लेकिन आज तक योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
रात में नहीं सिक्योरिटी का इंतजाम
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट अंधेरा पसरते ही असुरक्षित हो जाता है। आसपास आबादी नहीं होने के कारण शाम ढलने पर सड़क पर आवाजाही कम हो जाती है। इस कारण अभिभावक शाम के समय बच्चों को साथ लेकर सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में आने से बचते हैं। रात में यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।