फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झांसी बनेगा पूरे देश में माडल-City

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी बनेगा देश भर में मॉडल
विज्ञापन

झांसी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में झांसी जिले में हो रहे शौचालयों के निर्माण को देश में मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। यहां बने शौचालयों की गुणवत्ता, निगरानी समितियों की सक्रियता और प्रयोग की स्थिति और भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव पी. अय्यर के आश्वासन के बाद अफसरों में उत्साह बना है।
बड़ागांव ब्लाक के पारीछा व ढिमरपुरा समेत जिले के 56 गांवों को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया है। भारत सरकार के सचिव नौ दिसंबर को जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने शौचालय निर्माण की समीक्षा की थी व खुले में शौचमुक्त गांवों की हकीकत देखी थी। सुबह सवा चार बजे पारीछा पहुंचकर उन्होंने ग्रामीणों के दरवाजे खुलवाकर पूछा था कि क्या शौचालय बनवा लिया है, क्या खुले में शौच करने जाते हो, इस पर सभी ग्रामीणों ने सकारात्मक जवाब दिया था। इसी तरह वह ढिमरपुरा गांव गए तो उन्होंने शौचालय निर्माण की स्थिति जानी थी। बताया गया कि गांव में 139 परिवार हैं व सभी घरों में शौचालय बने हैं।
विज्ञापन

उपनिदेशक पंचायत आरएस चौधरी ने बताया कि भारत सरकार के सचिव ने जिले के शौचालयों के निर्माण की प्रगति को मॉडल मानते हुए पूरे देश में लागू करने का आश्वासन दिया है। अब इस पर काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि जल्द ही खुशखबरी मिलेगी कि झांसी को देश भर में मॉडल के रूप में प्रचारित किया जाएगा।

इनसे प्रभावित हुए स्वच्छता सचिव
भारत सरकार के स्वच्छता सचिव शौचालयों की गुणवत्ता, प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण की प्रगति, शौचालय के प्रयोग की अधिकता, जन सहभागिता से शौचालय निर्माण व प्रयोग की सफलता से भारत सरकार के सचिव प्रभावित हुए हैं।

सात किलोमीटर पहुंचने में लग गए 70 साल
ढिमरपुरा गांव झांसी शहर से सिर्फ सात किलोमीटर की दूरी पर है। यहां 139 परिवार रहते हैं। चार साल पहले तक गांव में सिर्फ दो परिवारों के पास शौचालय थे। यानी, आजादी के बाद से लेकर अब तक गांव की आबादी खुले में शौच जाती थी। लेकिन, अब पूरे गांव में प्रत्येक परिवार के पास अपना शौचालय है और गांव में कोई खुले में शौच नहीं जाता है।
विज्ञापन


निगरानी समितियां सक्रिय
खुले में शौच जाने वालों की सोच बदलने के लिए निगरानी समितियां सक्रिय हैं। समितियों की तीन कैटेगिरी बनाई गई हैं। इनमें पुरुष व महिला कैटेगिरी तथा बच्चों की कैटेगिरी में भी में 10 -10 सदस्य शामिल हैं। यह समितियां खुले में शौच जाने वालों का पीछा करती हैं और हूटिंग कर उन्हें शर्मिंदा करती हैं, ताकि वह खुले में शौच न जाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें