वीरांगना से जुडे़ धरोहर संवारे जाएं : योगेश राव
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोदर राव के वंशज योगेश राव ने कहा कि वीरांगना झांसी की रानी से जुडे़ धरोहरों को संवारना चाहिए। अमर उजाला से बातचीत में नागपुर निवासी पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर योगेश राव ने कहा कि उनकी कोशिश है कि वह लंबे समय तक झांसी में ठहरें। वह झांसी के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्हें अपनी मातृभूमि झांसी से बेहद प्रेम है।
उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को स्मरण और नमन करते हुए कहा कि क्रांति समाप्त होने के बाद दामोदर राव का जीवन बेहद कष्ट में बीता। वह वीरांगना के विश्वासपात्र सैनिकों के साथ जंगलों में भटकते रहे। 1860 में वह इंदौर पहुंचे। यहां कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने उनके संरक्षण के लिए सिफारिशें भी कीं। योगेश राव बताते हैं कि दामोदर राव ने अपनी स्मृति से रानी क ा चित्र बनाया था, जो आज भी उनके पास है। इसकी एक पेंटिंग का अनावरण कुछ साल पहले गणेश मंदिर में भी हुआ था। जो आज भी झांसी में है। उन्होंने कहा कि रानी से जुडे़ धरोहर स्थलों किला, रानी महल, राजा गंगाधर राव की छतरी को संवारने की आवश्यकता है।
बदल लिया था उपनाम
रानी लक्ष्मीबाई के पिता मोरोपंत तांबे के चचेरे भाई राजा राम तांबे के वंशज विश्राम तांबे का कहना है कि क्रांति के बाद भी अंग्रेजों का कहर जारी था। इसके चलते तांबे परिवार के कई सदस्यों ने अपना उपनाम तांबे से बदलकर भट्ट कर लिया था। गणेश मंदिर में अमर उजाला से बातचीत मेें उन्होंने कहा कि अंग्रेज कमिश्नर हार्डी को जब इसकी सूचना मिली, तब उन्होंने काशीनाथ भट्ट को बुलवाया और कहा कि वह अपना उपनाम तांबे ही लगाएं। उनके अनुसार तांबे परिवार के कई सदस्य ग्वालियर और नागपुर में रहते हैं। इनमें मोरोपंत तांबे के वंशज भी है।