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रानी के जाने के बाद 75 साल बंद रहा भांडेरी गेट

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रानी के जाने के बाद 75 साल बंद रहा भांडेरी गेट
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झांसी। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस 18 जून को मनाया जाएगा। महानगर में कई स्थल आज भी वीरांगना और उनके साथियों के शौर्य व संघर्ष की याद दिलाते हैं। इन्हीं में से एक भांडेरी गेट है। इसी गेट से रानी विदा हुई थीं। भांडेरी गेट रानी के जाने के बाद 75 साल बंद रहा। दरवाजे को 1933 में खोला गया था।
देश की आजादी के लिए हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और झांसी की अन्य वीरांगनाओं का अहम योगदान है। दरबारियों की सलाह पर रानी ने कालपी जाकर पेशवा की सेना में शामिल होने का निर्णय किया। 4 अप्रैल 1958 की रात हर हर महादेव का उद्घोष करती हुई रानी लक्ष्मीबाई और उनकी सेना टकसाल मार्ग से होकर भांडेरी गेट पर पहुंचीं। साहित्यकार डा. वृंदावन लाल वर्मा की पुस्तक झांसी की रानी के अनुसार भांडेरी गेट के निकट कोरी सैनिकों ने अंग्रेेजों से जबरदस्त युद्ध लड़ा। रानी के गेट से निकलने के बाद इसे बंद कर दिया गया। बाद में उसे 75 साल बाद खोला गया।
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जर्जर हालत में है यह दरवाजा
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की यह अनमोल धरोहर आज गुमनामी और जीर्णशीर्ण हालत में हैं। इसके चारों ओर अतिक्रमण है। वर्तमान में हाल यह है कि यह दरवाजा कभी भी गिर सकता है। इसके जीर्णोद्धार की मांग कई बार आम नागरिकों ने की लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। हालांकि पुरातत्व विभाग ने जरूर इसके संरक्षण करने की बात कही है।
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