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गर्मी में भी करा सकते हैं मोतियाबिंद का ऑपरेशन

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गर्मी में भी करा सकते हैं मोतियाबिंद का ऑपरेशन
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झांसी। गर्मी में भी मोतियाबिंद के आपरेशन आसानी से होते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है। कुछ लोग मोतियाबिंद के आपरेशन के लिए सर्दी का इंतजार करते हैं। यह खुद की ईजाद की हुई बात है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन किसी भी मौसम में सफलतापूर्वक कराया जा सकता है।
आंख की पुतली व लेंस पूर्णत: पारदर्शी होते हैं। हम जो भी वस्तु देखते हैं, उसे कॉर्निया और लेंस से आंख के पर्दे पर फोकस किया जाता है। पर्दे की नस से दिमाग में संकेत जाते हैं। इससे हम किसी वस्तु को ठीक से देख सकते हैं। जब कभी हमारी आंख के लेंस में सफेदी या धुंधलापन जाता है तो इसे मोतियाबिंद कहते हैं। यदि मोतियाबिंद का समय रहते ऑपरेशन न कराया जाए तो अधिक पकने पर मोतियाबिंद जनित काला पानी होने का खतरा बना रहता है, जिससे आंख में तेज दर्द होता है। आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
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ये हैं लक्षण
बढ़ती उम्र के साथ नजर का कम होते जाना या धुंधलापन बढ़ते जाना।
चश्मे का नंबर जल्दी-जल्दी बदलना।
दिन के समय कम दिखना व रात या अंधेरे में अधिक दिखना।
एक ही वस्तु कई - कई दिखाई देना।

ये हैं कारण
वृद्धावस्था : ये मोतियाबिंद सबसे अधिक पाया जाता है। प्राय: 50 साल की उम्र के बाद प्राकृतिक लेंस में धुंधलापन आने लगता है और व्यक्ति को धीरे-धीरे उम्र के साथ-साथ नजर कम पड़ने लगती है।
चोट के कारण : आंख में चोट लगने के कारण लेंस धुंधला होने लगता है और मोतियाबिंद हो जाता है।
मेटाबोलिक मोतिया: इस प्रकार का मोतिया कुछ शारीरिक बीमारियों के कारण हो जाता है, जैसे मधुमेह और कैल्शियम या फास्फोरस की अधिकता हो जाना।
पैदायशी मोतिया: यदि किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण जैसी बीमारियों हो जाएं तो नवजात शिशु में मोतियाबिंद होने की आशंका रहती है।
डेवलपमेंटल कैटरैक्ट: बच्चे के पैदा होने से लेकर युवावस्था तक इस प्रकार का मोतियाबिंद हो सकता है।


ऑपरेशन के प्रकार
एसआईसीएस: इस विधि में आंख में चीरा लगाकर पूरा लेंस बाहर निकालकर उसके स्थान पर एक कृत्रिम लेंस (आईओएस) डाला जाता है।
फेको विधि: इसमें बहुत छोटा चीरा लगाकर फेको मशीन से लेंस के छोटे - छोटे टुकड़ों में तोड़कर अल्ट्रासाउंड तरंगों से प्रत्यारोपित किया जाता है।
फेक्ट्रोलेजर: यह अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें मोतिया को तोड़ने का कार्य फेक्ट्रोलेजर द्वारा किया जाता है और टुकड़ों को बाहर निकालने का कार्य फेको से किया जाता है।
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मोतियाबिंद का एकमात्र उपचार ऑपरेशन ही है लेकिन शुरुआती स्टेज में कुछ दवाइयों के प्रयोग से मोतियाबिंद का बढ़ना कुछ कम हो जाता है। जब चश्मे इत्यादि के प्रयोग के बाद भी व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या प्रभावित होने लगे तब ऑपरेशन के बारे में सोचना चाहिए। हर मौसम में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया जा सकता है। - डॉ. रमेश चंद्रा, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ।
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