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अदालत ने सजा को रखा बरकरार

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अदालत ने सजा को रखा बरकरार
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झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या पांच अभय श्रीवास्तव की अदालत में दहेज उत्पीड़न के मामले में सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया है।
पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भान प्रकाश सिरवैया ने बताया कि रागिनी देवी निवासी खैलार थाना बबीना का विवाह 18 जून 2002 को सिविल लाइन ललितपुर निवासी इंद्रभान सिंह यादव के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही कार की मांग पूरी न होने पर ससुरालीजनों ने उत्पीड़न शुरू कर दिया। रागिनी ने भरण-पोषण के लिए मुकदमा दायर किये जाने पर बौखलाए पति इंद्रभान, ससुर दातार सिंह, सास रामसखी व देवर राघवेंद्र सिंह ने 25 जुलाई 2005 को गाली गलौच, मारपीट कर उसे गंभीर रुप से घायल कर दिया था।
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शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। जिसके चलते पीड़िता ने धारा 156(3) के अंतर्गत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। जहां धारा 498 ए, 323, 504, 506 एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में प्रतिवाद के रुप में दर्ज मुकदमे में एजीजेएम कक्ष संख्या 02 के न्यायालय में अभियुक्तों को धारा 498 ए में एक वर्ष के कारावास, बीस हजार रुपये अर्थदंड, धारा 323 व 04 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में छह माह का कारावास, बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। इसके विरुद्ध अभियुक्तों द्वारा की गई अपील में सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभय श्रीवास्तव के न्यायालय में अपील खारिज कर अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा गया है। अभियुक्तों की जमानत निरस्त कर अभिरक्षा में लेकर जेल भेजे जाने का आदेश भी दिया गया।
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