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चुनाव: सपा-बसपा सहेज कर नहीं रख पाईं अपना वोट

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सपा-बसपा सहेज कर नहीं रख पाईं अपना वोट
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झांसी। पिछले लोकसभा चुनाव में मिले वोटों को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहेज के नहीं रख पाई। इस बार साथ में चुनाव लड़ रहीं दोनों पार्टियों को पिछले चुनाव के मुकाबले डेढ़ लाख वोट कम मिले। जबकि, भाजपा, सपा और बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही।
2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अलग-अलग मैदान में थीं। झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में पिछले चुनाव में सपा को 3,85,422 वोट मिले थे और बसपा के खाते में 2,13,792 वोट गए थे। सपा दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। जबकि, भाजपा ने 5,75,889 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। पिछले चुनाव के वोटों के गणित के आधार पर इस चुनाव में सपा-बसपा एक साथ मैदान में कूदीं थीं। पिछले चुनाव में जो पार्टी जिस सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी, इस चुनाव में गठबंधन में वो सीट उसके खाते में गई थी। इसी फार्मूले के आधार पर यहां से बसपा के समर्थन से सपा प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया था। दोनों पार्टियां ये मान के चल रहीं थी कि पिछले चुनाव में बसपा और सपा को अलग-अलग मिला वोट भाजपा के वोट से 23,325 अधिक था। ऐसे में भाजपा को कड़ी चुनौती मिलने की संभावना जताई जा रही थी लेकिन गठबंधन का ये फार्मूला बुरी तरह से पिट गया। सपा-बसपा पिछले चुनाव में मिला अपना वोट सहेज के नहीं रख पाईं। दोनों पार्टियों को पिछले लोकसभा चुनाव में जहां 5,99,214 वोट मिले थे, तो वहीं इस बार गठबंधन प्रत्याशी को 4,43,589 वोट ही हासिल हो पाए। यानी कि पिछले चुनाव के मुकाबले सपा-बसपा के वोटों में 1,55,625 की कमी आई।
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वहीं, भाजपा इन दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही। भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में 2,33,283 वोट अधिक मिले। भाजपा के अनुराग शर्मा ने 8,09,272 वोट हासिल कर 3,65,683 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की।

गठबंधन के प्रत्याशी को बसपा का पूरा वोट मिला। पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता ने चुनाव में अपना योगदान दिया लेकिन परिणाम चौंकाने वाले हैं। वोट कम क्यों हुआ, इसका विश्लेषण किया जा रहा है। इसके बाद ही सही वजह निकलकर सामने आएगी। - रामबाबू चिरगइयां, जिलाध्यक्ष, बसपा।

गठबंधन प्रत्याशी को दोनों दलों का वोट मिला। पिछले चुनाव के मुकाबले वोटों में जो कमी आई है, उसकी वजह माहौल है। माहौल मोदीमय होने की वजह से हवा का वोट हमें नहीं मिल पाया। भाजपा इसे अपने खाते में पहुंचाने में कामयाब रही। - मिर्जा करामत बेग, नगर अध्यक्ष, सपा
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भरोसा पैदा नहीं कर पाया गठबंधन
बुंदेलखंड महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बीआर मौर्य का इस मसले पर कहना है कि गठबंधन जनता में अपने प्रति विश्वास पैदा नहीं कर पाया। जबकि, भाजपा ये करने में कामयाब रही। यही वजह है कि सपा-बसपा के वोटों में कमी आई और भाजपा का बढ़ा। दूसरी वजह ये भी है कि सपा और बसपा ने ग्राउंड लेवल पर होमवर्क नहीं किया। दोनों दलों ने मान लिया कि गठबंधन होते ही सबकुछ बदल जाएगा लेकिन धरातल पर स्थिति इतर रही। दोनों दल तो मिल गए, परंतु दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के दिल नहीं मिल पाए।
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