दो साल से छोटे बच्चे को डब्बा बंद शिशु आहार देना अपराध
झांसी। मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। जन्म के शुरूआती छह महीने तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना जरूरी है। वहीं, छह माह से दो साल तक के बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार देना चाहिए। बाजार में मिलने वाला डब्बा बंद शिशु आहार को मां के दूध जितना पोषक होने का दावा करना, उसके प्रचार-प्रसार करना और दो साल से कम उम्र वाले बच्चों को ऐसा आहार देना कानूनन अपराध है।
भारत सरकार की ओर से महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय द्वारा 1992 में शिशु दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल एवं शिशु आहार अधिनियम को लागू किया गया था। 2003 में अधिनियम को संशोधित किया गया। अधिनियम के तहत कोई भी मां के दूध के विकल्प के तौर पर किसी भी डब्बा बंद दूध, शिशु आहार या दूध की बोतलों का उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या प्रचार नहीं कर सकता है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी व्यक्ति को 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल या शिशु आहार खरीदने अथवा उपयोग करने के लिए किसी भी तरीके से प्रोत्साहित करना प्रतिबंधित है। अगर इसे बढ़ावा देते या दो साल से छोटे बच्चे को ऐसा आहार देते हुए कोई स्वास्थ्य कर्मचारी पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अधिनियम का उद्देश्य दो साल तक के बच्चों के दूध के विकल्प व संबंधित उत्पादों के समर्थन पर रोक लगाना, गर्भवती महिला और धात्री माताओं को शिक्षित व जागरूक करना, शिशु दूध के विकल्प और शिशु खाद्य सामग्री को बाधित व नियंत्रित करना है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि नवजात के लिए सर्वप्रथम मां का दूध ही सर्वोपरि है। छह माह तक सिर्फ स्तनपान ही जरूरी है। छह माह से 2 साल तक स्तनपान के साथ पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। सरकार ने स्तनपान के विकल्प को बढ़ावा देने और प्रचार-प्रसार करने के लिए ही शिशु दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल एवं शिशु आहार अधिनियम लागू किया है। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता मिला तो उसे 6 माह से 3 साल तक की सजा और दो से पांच हजार तक का जुर्माना या दोनों की कार्रवाई की जा सकती है। अनुचित भोजन उत्पाद एवं वस्तुएं बच्चों में कुपोषण, विकृति और मृत्यु दर का कारण बनती है।
ये हैं स्तनपान के फायदे
- मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक भोजन है।
- बच्चे को बीमारियों से बचाता व अधिक बुद्धिमान बनाता है।
- स्तनपान कराने से माता-पिता को बच्चों के अंतराल में मदद मिलती है।
- मां के दूध में अंतर्निहित एंटी संक्रमित गुण होते हैं, जो किसी अन्य दूध में नहीं होता।
- स्तनपान कराने से गर्भावस्था के दौरान मां को अतिरिक्त वजन कम करने में मदद मिलती है।