प्रदेश सरकार का ग्रामीण क्षेत्रों को बीस घंटे बिजली देने का दावा हवा हवाई साबित हो रहे है। अघोषित कटौती के कारण गांवों में मुश्किल से 15 घंटे ही बिजली मिल रही है। ओवरलोडिंग और कम उत्पादन बताकर कटौती की जा रही है।
भीषण गर्मी ने प्रदेश के बिजली ढांचे को बेहाल कर रखा है। इन दिनों प्रदेश में 15 हजार मेगावाट बिजली की मांग है और बिजली खरीदने के बाद भी उपलब्धता 13500 मेगावाट है। सामान्य दिनों में प्रदेश में बिजली की मांग 10 से 11 हजार मेगावाट की रहती है। चूंकि, प्रदेश सरकार ने महानगरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे बिजली देने के आदेश दे रखे हैं, लेकिन बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा है। झांसी जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सुबह पांच से छह बजे, सुबह 10.30 बजे से 12.30 बजे और शाम 5.45 बजे से 6.15 बजे तक निर्धारित कटौती की जा रही है। इसके अलावा रात और दिन में अलग-अलग समय चार से पांच घंटे तक की कटौती की जा रही है। सोमवार को ही शाम सात बजे से नौ बजे तक और रात 12 से 2 बजे तक इमरजेंसी कटौती की गई। बिजली की अंधाधुंध कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग परेशान हैं। अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) डी यादवेंदु ने बताया कि पनकी कंट्रोल के आदेश के बाद ही इमरजेंसी कटौती की जा रही है।
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एक माह में फुंके 289 ट्रांसफार्मर
जनपद में ओवर लोडिंग के कारण 15 अप्रैल से 14 मई के बीच 289 ट्रांसफार्मर फुंक गए। बताया गया है कि मुन्नालाल वर्कशाप में तैयार हो रहे ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण थोडी-बहुत ओवरलोडिंग में ही ट्रांसफार्मर जवाब दे रहे हैं।