फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनरेगा मजूदरों को पंद्रह दिन से नहीं मिली मजदूरी

विज्ञापन
15 day wages reamain in manrega
विज्ञापन
झांसी। प्रवासी मजूदरों को रोजगार देने के नाम पर सरकार ने मनरेगा का बजट बढ़ाने का दावा किया लेकिन, अब बजट की कमी से मनरेगा मजदूरों का उनकी मजदूरी ही समय पर नहीं मिल रही। झांसी में 33 हजार मजदूरों को पिछले पंद्रह दिन से मजदूरी नहीं दी गई। उनका करीब 10 करोड़ रुपया बकाया हो गया। इसके चलते तमाम मजदूर अब काम पर भी नहीं आ रहे हैं। इस परेशानी को देखते हुए तमाम मजदूर पलायन को भी मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन

कोविड प्रकोप के बाद बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव वापस लौटे। गांव में ही इनको रोजगार दिलाने के लिए सरकार ने कई महकमों को मनरेगा से काम कराने के निर्देश दिए। प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद यहां कुल 23114 नए जॉबकॉर्ड बनाए गए। शुरुआती महीनों में तो व्यवस्था ठीक चली लेकिन, अब गाड़ी पटरी से उतर रही है। कई विभाग मनरेगा कंवर्जेशन से काम कराने को आगे राजी नहीं हैं। वहीं, समय पर लेबर कास्ट का बजट जारी न होने से नई परेशानी पैदा हो रही है। कार्यदायी संस्था के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के पहले पखवारे तक 70 हजार से अधिक मनरेेेगा मजदूर थे लेकिन, दूसरे पखवारे के खत्म होने तक यह संख्या आधी से भी कम रह गई। नियमों के मुताबिक मस्टर रोल भरने के आठ दिन के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए लेकिन, 33 हजार मजदूरों को मस्टर रोल पूरा होने के पंद्रह दिनों बाद भी मजदूरी नहीं मिली। ऐसे में इन मजदूरों को बेहद परेशानी उठानी पड़ रही है। मजदूरी मिलनी बंद हो जाने से मजदूरों ने काम पर आना भी बंद कर दिया। कई मजदूर मनरेगा की पतली हालत देख अब वापस रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर रूख कर रहे हैं।
केंद्र सरकार जारी करती है बजट
कोविड प्रकोप आरंभ होने के बाद मनरेगा के बजट आवंटन व्यवस्था में भी बदलाव हुआ। पहले मजदूरी एवं मैटीरियल का पूरा पैसा एक ही खाते में दिया जाता था लेकिन, इसमें बदलाव करते हुए इसके अलग-अलग पैसे दिए जाने लगे। नई व्यवस्था में मजदूरी का पैसा अलग एवं मैटीरियल का पैसा अलग से दिया जाता है। मजदूरी मद में दिया जाने वाला पूरा पैसा केंद्र सरकार वहन करती है जबकि मैटीरियल में पच्चीस फीसदी रकम राज्य सरकार भी मिलाती है। सूत्रों का कहना है मैटीरियल पर पर्याप्त पैसा दिया जा चुका लेकिन, केंद्र सरकार ने मजदूरी के मद में भेजी जाने वाली रकम ही एलॉट नहीं की। इसी वजह से मजूदरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बता दें, मनरेगा मजदूरों को 201 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मस्टर रोल फीडिंग का काम बकाया नहीं है। पैसा मिलते ही उसे सीधे खाते में भेज दिया जाता है।
शैलेष कुमार
सीडीओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें