अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जनपद के 2.43 लाख किसानों में से सिर्फ 97,978 ने ही फसलों का बीमा कराया है। इससे 100 हेक्टेयर कृषि भूमि ही फसल बीमा के दायरे में आ पाई है। बीमा कराने के लिए महज दो दिन का ही समय बचा है।
झांसी के किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं के शिकार होते चले आ रहे हैं। कभी समय से बारिश न होने से फसलें प्रभावित हो जाती हैं, तो कभी ज्यादा बारिश किसानों की मेहनत और लागत को बर्बाद कर देती है। इसी साल मार्च की शुरुआत में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलें बुरी तरह से बर्बाद हो गई थीं। ऐसे में यहां फसलों का बीमा होना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके बावजूद, हालात इतर हैं।
इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में 2.43 लाख किसान हैं। इनमें से 1.5 लाख किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हैं। लेकिन 97,378 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया है। बीमा कराने वालों में 90,046 किसान केसीसी धारक हैं, जबकि 5,332 किसान बगैर केसीसी धारक हैं। फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
किसानों को फसल बीमा कराने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जन सेवा केंद्रों के माध्यम से भी यह काम किया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा किसान अपनी फसलों का बीमा कराएं, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - कुलदीप कुमार मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी
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इतना देना होता है प्रीमियम
फसल बीमा का प्रीमियम अलग-अलग जिंसों का अलग-अलग है। मसूर की प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 64,500 रुपये है, इसका बीमा प्रीमियम 968 रुपये अदा करना होता है। जौ की 45,400 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमित राशि है और इसका प्रीमियम 681 रुपये देना होता है। इसी प्रकार, मटर की बीमित राशि 81,100 रुपये है और इस पर प्रीमियम 1217 रुपये लिया जाता है। जबकि, गेहूं की प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 68,700 रुपये है और प्रीमियम 1031 रुपये अदा करना होता है। चना की बीमित राशि 74,800 रुपये प्रति हेक्टेयर है और इसका प्रीमियम 1122 रुपये लिया जाता है। सरसों की बीमित राशि 52,300 रुपये प्रति हेक्टेयर और प्रीमियम 785 रुपये तय किया गया है।