सर्दी में सिकुड़ी ट्रेनों की रफ्तार, 60 किलोमीटर प्रति घंटे
- कोहरे के कारण रेल प्रशासन सतर्क, ड्राइवरों की ड्यूटी दस घंटे से ज्यादा नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
कोहरा शुरू होते ही रेल प्रशासन सतर्क हो गया है। तय किया गया है कि कोहरे के दौरान ट्रेनें 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ज्यादा नहीं चलाई जाएंगी। ड्राइवरों से एक बार में 10 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं ली जाएगी, ताकि वे सतर्क रहें।
कोहरे की सबसे अधिक मार झांसी-दिल्ली सेक्शन में पड़ती है। आम दिनों में रनिंग स्टाफ को झांसी से नई दिल्ली सवारी गाड़ी ले जाने में छह से आठ घंटे का समय लगता है। जबकि, कोहरे में यही दूरी तय करने में पंद्रह से अठारह घंटे लग जाते हैं। दस घंटे बाद चालक दल को एक-एक मिनट गुजारना भारी पड़ता है। ऐसे में वे सेक्शन खाली देख ट्रेन को दौड़ाना शुरू कर देते हैं। यही गलती अक्सर रेल दुर्घटना का कारण बन जाती है। झांसी से गुजरने वाले रेल ट्रैकों का संचालन मॉडीफाइड सेमी आटोमैटिक सिगनलिंग सिस्टम से जुड़ा हुआ है। रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि चालक कोहरे में दस घंटे से अधिक ट्रेन नहीं चलाएंगे। मालूम हो कि रेल मंडल में रोजाना एक सौ पच्चीस सवारी व सौ के लगभग मालगाड़ियों का संचालन होता है।
ये रही गाइड लाइन
लोको पायलट ऑटोमेटिक सिगनल को लाल होने की दशा में दिन में एक मिनट तथा रात में एवं कोहरे में दो मिनट रुकने के बाद अधिकतम 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अगले सिगनल तक गाड़ी ले जाएंगे। गार्ड को ध्यान रखना होगा कि लोको पायलट निर्धारित गति से अधिक न चलें। इसके साथ ही निर्धारित से अधिक गति पकड़ने या अन्य स्थितियों में लोको पायलट का ध्यान आकर्षित करने के लिए यथा शक्ति प्रयास करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर गार्ड धीरे-धीरे ब्रेक लगाएंगे। जब गाड़ी किसी ऑटोमेटिक सिगनल के लाल होने पर नियमानुसार रुकेगी, तब गार्ड पीछे की ओर लाल सिगनल दिखाएंगे।