स्कैनिंग से तैयार होंगा ललितपुर का नक्शा
ललितपुर।
नगर व तहसीलों के अभिलेखों में वर्षों से गायब चल रहे बंदोबस्ती नक्शा बनाने के लिए जिलाधिकारी द्वारा राजस्व परिषद को पत्र लिखा गया है। किसी भी जिले का नक्शा गायब होने की स्थिति में जिला प्रशासन की मांग पर राजस्व परिषद द्वारा उत्तराखंड प्रदेश के रुढ़की से स्कैनिंग द्वारा तैयार कर जिलों को उपलब्ध कराया जाता है। बता दें कि ललितपुर नगर समेत जनपद के आठ गांव के नक्शे गायब चल रहे हैं, जिनको दोबारा बनवाने के लिए डीएम द्वारा यह पहल की गई है।
जिला में ललितपुर, तालबेहट, पाली और महरौनी तहसीलों के अभिलेखों में बंदोबस्ती नक्शा की कई सीटें वर्षों से गायब चल रही हैं। इसमें नगर के मानचित्र की सीट नंबर पांच के साथ ही कस्बा तालबेहट, पाली, जाखलौन, डोंगराकलां, गदयाना, बिजरौठा और महरौनी के एक बड़े भू-भाग का नक्शा गायब चला आ रहा है। तहसीलों में अधिकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं होने के चलते भूस्वामियों को न्यायालय और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। तहसील ललितपुर के तहसील राजस्व विभाग ने शहर के भूमि मानचित्र को 11 सीटों में विभक्त किया है। जिसकी हर सीट में करीब 600 से 700 एकड़ जमीन को शामिल किया गया है। विभागीय कर्मियों की लापरवाही के कारण या फिर यूं कहें कि किसी साजिश के तहत नगर के भूमि मानचित्र की सीट नंबर पांच को गायब कर दिया गया था, जिसमें शहर की बेशकीमती जमीनों के प्रपत्रों में हेरफेर की गुंजाइश प्रबल हो गई थी। ललितपुर शहर की सीट नंबर पांच में नगर के इलाइट चौराहा, पीतांबरा अस्पताल से श्मशान घाट वाली जगह, सदनशाह क्षेत्र, कचहरी चौराहा से तुवन क्षेत्र, आजादचौक, नदीपुरा में बड़ी देवी समेत बहुत सा पुराना ललितपुर का क्षेत्र शामिल है। विभागीय जानकारों की मानें तो नगर ललितपुर के मानचित्र की यह सीट नंबर पांच करीब पंद्रह वर्ष पहले गायब हो गई थी और तब से उक्त मानचित्र की सीट के बिना ही जमीनों की नापजोख का कार्य पुराने नक्शों की डुप्लीकेट प्रतियों से किया जा रहा है। उक्त मानचित्र के अभाव में न्यायालयों में कई वाद अब भी लंबित चल रहे हैं। वर्तमान में उक्त नक्शा उपलब्ध नहीं होने के कारण पुराने नक्शे की फोटोकॉपी या सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए तत्कालीन नक्शा के आधार पर भूमि की नापजोख का काम किया जा रहा है। राजस्व कर्मियों के अनुसार सिंचाई विभाग द्वारा जो नक्शा बनाया गया है, वह भी अधिकृत नहीं है, ऐसे में उक्त पुराने नक्शा की प्रति लेकर अंदाजा से ही काम किया जा रहा है। साथ ही सिंचाई विभाग का यह नक्शा वर्तमान में जमीन की स्थिति व स्वरुप के अनुुरुप भी पूर्ण नहीं है। ऐसे में बस किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है। जिसमें गड़बड़ी की गुंजाइश अधिक रहती है। ऐसी स्थितियां सामने आने पर और जनपद में अधिकृत नक्शा तहसीलों में नहीं होने की जानकारी होने पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने ललितपुर शहर के मानचित्र की गायब चल रही सीट नंबर पांच समेत तालबेहट, पाली, जाखलौन, डोंगराकलां, गदयाना, बिजरौठा और महरौनी के बंदोबस्ती भू-मानचित्र की स्कैनिंग कराकर नया मानचित्र बनाने के लिए राजस्व परिषद लखनऊ के चेयरमैन को पत्र लिखा है। उम्मीद जताई जा रही है कि शीघ्र ही राजस्व परिषद द्वारा रुढ़की से उक्त नक्शों की स्कैनिंग कराकर ललितपुर के लिए उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
बार-बार पत्राचार के बाद भी नहीं मिली सफलता
भूस्वामियों द्वारा कई बार आरटीआई और न्यायालयों द्वारा गायब बंदोबस्ती नक्शा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व कर्मियों को तलब भी किया गया। जिसके कारण भूलेख कार्यालयों व राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव से कई बार तत्कालीन जिला प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। वर्ष 2003 व 2005 में तहसीलदार विनय प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा भूलेख विभाग के माध्यम से राजस्व परिषद लखनऊ और इलाहाबाद को नक्शा उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
रुढ़की में होता है रिकॉर्ड
ललितपुर। उत्तर प्रदेश के किसी भी जनपद का मानचित्र गायब होने पर उसे बनवाने की तकनीकी व्यवस्था उत्तराखंड के रुढ़की में होती है। जिला प्रशासन द्वारा राजस्व परिषद के माध्यम से एक बार फिर से रुढ़की से उक्त मानचित्र के अनुरूप स्कैनिंग कराए जाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि नगर समेत आठ गांव के नक्शे शीघ्र ही राजस्व परिषद द्वारा बनवाकर ललितपुर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जाएंगे।
इनका कहना है-
ललितपुर के नगर समेत आठ गांव के गायब नक्शे बनवाने के लिए डीएम के माध्यम से राजस्व परिषद के चेयरमैन को पत्र लिखा गया है। किसी भी जिले का वास्तविक नक्शा रुढ़की में उपलब्ध होता है। ललितपुर व पाली समेत सभी आठ गांव के नक्शे प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा यह पहल की गई है।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी ललितपुर।