बच के रहिए इन झींगुरों से
- अपने अनुकूल सीजन में जमीन से निकले बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
अनुकूल सीजन आते ही जगह-जगह झींगुरों का जमावड़ा हो गया है। कहीं लोगों को कपड़ों के अंदर घुसकर तो कहीं खाने-पीने की चीजों में गिरकर ये सता रहे हैं। गंदगी में बैठने के कारण जब ये किसी व्यक्ति की त्वचा को छूते हैं, तो बैक्टीरिया या वाइरस छोड़ देते हैं। इससे फंगल इंफेक्शन फैलने का खतरा बना है।
इन दिनों सूरज ढलने के बाद घरों में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट तक जलाना मुसीबत भरा हो गया है। लाइट खोलते ही झींगुर घरों में आकर उछलकूद शुरू कर देते हैं। वैसे तो इनसे बड़ा खतरा नहीं है लेकिन फंगल इंफेक्शन फैल सकता है। फंगल इंफेक्शन होने के बाद तुरंत ही त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। झींगुर विषमतापी जीव होते हैं, इसलिए अधिक ठंड या गर्मी नहीं झेल पाते और जमीन में मिट्टी के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। लगभग चार से छह माह यह जमीन के अंदर रहते हैं। 26 से 36 डिग्री सेल्सियस तापमान इनके लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसी परिस्थिति जाती हुई गर्मी और शुरू होने वाली बारिश का सीजन होता है। पहली ही बारिश में ये जमीन से निकलकर बाहर आ जाते हैं और प्रजनन शुरू कर देते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. जेपी यादव बताते हैं कि जीव विज्ञान की भाषा में इनको ग्रीलस अथवा क्रिकेट के नाम से जाना जाता है। विश्व में इनकी प्रजातियां 900 हैं, जबकि भारत में बहुतायत में दो यानी कि हाउस क्रिकेट और फील्ड क्रिकेट झींगुर पाए जाते हैं। हाउस क्रिकेट हल्के भूरे रंग के होते हैं। फील्ड क्रिकेट काले व आकार में हाउस क्रिकेट से बड़े होते हैं। ये अधिकतर घास-फूस में पाए जाते हैं। झींगुरों में सिर्फ नर ही आवाज करते हैं। जब ये तेज आवाज करते हैं, तो दूसरे नर झींगुरों को अपने पास से भगाने के लिए डराने की कोशिश करते हैं। जबकि, मादा झींगुर को आकर्षित करने के लिए इनके स्वर बदल जाते हैं। मानसूनी सीजन में जब अधिक मात्रा में बारिश शुरू हो जाती है, तो ये धीरे-धीरे मरने लगते हैं।
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झींगुर से जुड़ी खास बातें
- एक झींगुर का अधिकतम जीवन 90 दिन होता।
- 26-36 डिग्री सेल्सियस है अनुकूल तापमान।
- झींगुर मादा एक बार में सौ से दो सौ अंडे देती।
- अंडे फूटते के 14 दिन बाद ये उड़ने लगते।
- 40 दिन में झींगुर हो जाते हैं वयस्क।