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Jhansi News: पुरातत्व संग्रहालय में अब भी धूल खा रही 134 प्रतिमाएं

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ललितपुर। पुरातत्व संग्रहालय परिसर के रखरखाव तथा संसाधनों के प्रति प्रशासन उदासीन होता नजर आ रहा है। यहां पर आने वाले आगंतुकों को यहां फैली गंदगी से दो चार होना पड़ता है तो वहीं यहां पर मुर्तियों के उचित रखरखाव न होने से 134 मुर्तियां धूल फांक रहीं है। भवन में जगह जगह मकड़जाल है और मूर्तियों के प्लेटफार्म पर फैली है गंदगी, यहां तक कि शौचालय भी बनवाए गए थे।
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नेहरूनगर में करीब चौदह वर्ष पहले पुरातत्व संग्रहालय भवन का करीब बीस लाख रुपये की लागत से निर्माण किया गया था। इसमें विभिन्न प्राचीन स्थलों से प्राचीन संपदा रूपी पत्थर की आकर्षक नक्काशी युक्त मूर्तियों को संरक्षित करके रखा गया है। इन मूर्तियों में उनकी पहचान छुपी हुई है। उस समय संग्रहालय की पूरी देखभाल होती थी। यहां बारहवीं सदी की धौरीसागर गांव से मिला वास्तुखंड, छठवीं सदी की कुचदौं से प्राप्त चैत्य गवाक्ष युक्त रथिका में यम, नौंवी सदी की ग्राम कुचदौं से मिली शुकनास की मूर्ति, कुचदौं से ही मिली दसवीं सदी की लेटे हुए विष्णु मूर्ति, दसवीं सदी की रथिका में कुबेर की मूर्ति, दसवीं सदी की ही कुचदौं से मिली विष्णु प्रतिमा का ऊर्ध्व भग्न भाग, नौंवी सदी की माहेश्वरी प्रतिमा का अधोभाग, नौवीं सदी की वैष्णवी मूर्ति, बारहवीं सदी की भैरव प्रतिमा, ग्राम धौरीसागर से मिलील ग्यारहवीं सदी की सप्तमातृ का पट्ट की प्रतिमाओं समेत करीब 134 मूर्तियों केेे संरक्षित किया गया है।
पुरातत्व विभाग द्वारा यहां चार किलोवाट क्षमता का बिजली कनेक्शन के साथ ही पेयजल व्यवस्था के लिए बोरिंग कराई गई। यहां तक कि शौचालय भी बनवाए गए थे। लेकिन इस संग्रहालय की लगातार उपेक्षा के चलते यहां न तो साफ सफाई भी नियमित होती है और न ही रंगाई पुताई एवं मरम्मत का काम भी समय से होता है। हालांकि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा हर महीने में एक या दो बार सफाई कर्मचारी के माध्यम से सफाई कराई जाती है।
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पुरातत्व संग्रहालय में कर्मचारियों की कमी होने के चलते सारी व्यवस्थाएं समय से नहीं हो पा रही हैं। कर्मचारियों के लिए शासन स्तर से प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही संविदा के रूप में कर्मचारी मिल सकते हैं। कुछ समय पूर्व ही यहां पेवरब्रिक्स व कुर्सियां लगवाई गई हैं। - मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।
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