परीक्षण के बाद होगा शेल्टर होम का निर्माण
झांसी। शेल्टर होम के लिए काटी जा रही करगुवां की पहाड़ी के मामले में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि गठित की गई कमेटी की रिपोर्ट के परीक्षण के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय लिया जाएगा। तब तक कार्यदायी संस्था को काम कराने के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि, खनिज विभाग को
‘असुरक्षित जोन’ में किसी भी प्रकार के निर्माण से आपत्ति नहीं है। खनिज विभाग के खान निरीक्षक मुकेश मिश्रा का कहना है कि कोई भी अनुमति लेकर निर्माण करा सकता है।
नवंबर में दो मजदूरों की मौत के बाद प्रशासन की तरफ से तैयार कमेटी ने करगुवां पहाड़ी को ‘असुरक्षित जोन’ घोषित करने के लिए रिपोर्ट सौंपी थी। तब से लेकर अब तक वहां पर हर प्रकार से पहाड़ी के कटान का काम बंद पड़ा था। कुछ दिन पहले ही नगर निगम के सदन में शेल्टर होम का निर्माण कराने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिसके आधार पर कार्यदायी संस्था ने पहाड़ी पर कटान कर उसे समतल बनाने का काम शुरू कर दिया था। ‘अमर उजाला’ की खबर पर डीएम शिवसहाय अवस्थी ने तत्काल खनिज विभाग की टीम को भेजकर काम रुकवा दिया था। निर्माण को लेकर डीएम ने परीक्षण के उपरांत ही पहाड़ी को असुरक्षित करार करने का फैसला लिया है। तब तक कार्यदायी संस्था को इंतजार करना होगा।
वहीं, खनिज विभाग के अधिकारियों ने जांच में पाया कि पहाड़ी पर शेल्टर होम के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने कोई अनुमति नहीं मांगी थी। इस कारण काम को रुकवा दिया गया था। इधर, नगर निगम ने अनुमति लेने के लिए अब तक कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई है। खनिज विभाग के खान निरीक्षक मुकेश मिश्रा ने कहा कि पहाड़ी को समतल करने के लिए यदि नगर निगम अनुमति मांगता है तो उन्हें दे दी जाएगी। इतना ही नहीं क्षेत्र में विकास के लिए किसी को भी अनुमति दी जा सकती है और यह तो सरकारी काम है। इसमें किसी भी प्रकार से कोई बाधा नहीं डाल सकते हैं।
ऐसे तो मिट जाएगा पहाड़ी का नामोनिशान?
खान निरीक्षक ने जिस प्रकार से पहाड़ी को समतलीकरण करने पर कोई आपत्ति न जताते हुए अनुमति देने की बात कही उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में पहाड़ी को समतल कर उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। बता दें कि पूर्व में इस पहाड़ी पर पहाड़ी को काट कर कई अवैध निर्माण कराए गए थे। उस वक्त भी खनिज विभाग ने कोई सुध नहीं ली थी।