केंद्र सरकार देश के साथ-साथ शिक्षा को स्मार्ट बनाने की बात कर रही है। हकीकत में युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के नाम पर छलने का काम किया जा रहा है। कारण आज की आधुनिक तकनीक के एवज में पुरानी तकनीक से ही शिक्षा दी जा रही है।
घरों में जब एलईडी व एलसीडी टीवी का चलन बढ़ा है, उस दौर में आईटीआई के इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक के छात्र सीआरटी (कैथोड रे ट्यूब) पद्धति की टीवी को रिपेयर करना सीख रहे हैं। आज भी टीवी, सीआरओ (क्रिस्टिल रे ऑक्सीलेटर) इलैक्ट्रॉन गन जैसे टॉपिक को सिलेबस में शामिल है।
आज के दौर में डिजिटल मशीनों के मार्केट में आने के बाद से टेक्नोलॉजी स्मार्ट हो गई है। लेकिन, उनसे संबंधित एक भी टॉपिक उसमें शामिल नहीं है। एक समय था जब इस ट्रेड में एडमिशन लेने के लिए अथ्यर्थी इच्छु़क रहता था पर आज रुचि कम होती जा रही है।
कुछ ही टॉपिक रोजगारपरक
आईटीआई के इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक ट्रेड में कुछ ही टॉपिक रोजगारपरक हैं जैसे ट्रांसफार्मर, आईसी, डायोड, रजिस्टेंस कलर कोड, लेड एसिड बैटरी, रेक्टीफायर की जानकारी। इनका उपयोग आज भी कहीं न कहीं हो रहा है।
सिलेबस बना गले की फांस
आईटीआई के इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक ट्रेड के इंस्ट्रक्टर ब्रह्मेश्वर सिंह ने बताया कि यह सच है कि बदलते समय के साथ टेक्नोलॉजी में बड़ा परिवर्तन हुआ है। इसे सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए पर एनसीवीटी की ओर से जारी होने वाले सिलेबस में बदलाव न होने से वह उच्च तकनीकी की शिक्षा नहीं दे सकते हैं।
केवल थ्योरी सीख रहे अभ्यर्थी
आईटीआई के ट्रेड में कौशल को मजाक बना रहा है। यहां केवल थ्योरी की शिक्षा दी जाती है। प्रैक्टिकल के नाम पर यहां कोंपोनेंट ही उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि तकनीकी क्षेत्र में आईटीआई के छात्र कहीं न कहीं सफल नहीं हो पा रहे हैं।
केवल सपना ही दिखा रहे
जीआईसी में पिछले माह रोजगार मेले में सूबे के व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास, युवा कल्याण और खेल मंत्री चेतन चौहान ने मंच से नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान स्किल डेवलपमेंट को एडवांस बनाने का वादा किया था। उन्होंने एडवांस टेक्नोलॉजी को लेकर भारत की तुलना दक्षिण कोरिया और जापान से की थी। उसी के आधार पर आधुनिक तकनीकी शिक्षा देने का आश्वासन दिया था पर अब तक उस पर मोहर नहीं लगी है।
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इंतजार है नई तकनीक का
ट्रेड में आज भी पुराना सिलेबस शामिल है। बदलते दौर के साथ तकनीकी शिक्षा में भी बदलाव होना चाहिए। एलईडी और एलसीडी के दौर में हमें आज भी व्लैक एंड व्हाइट टीवी से संबंधित जानकारी दी जाती है।
जेबा, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक छात्रा
तकनीक से बढ़ेगा रोजगार
पुरानी शिक्षा पद्धति की शिक्षा से रोजगार बढ़ने के अवसर बहुत कम है। बदलते समय के साथ शिक्षा को भी एडवांस बनाना होगा। सिलेबस को बदलकर नए टॉपिकों को शामिल करना होगा, जो आज की जरूरत हैं।
प्रियंका, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक छात्रा
सीखने में दिलचस्पी बढ़ेगी
नई टेक्नोलॉजी की शिक्षा दी जाए तो शायद छात्रों की दिलचस्पी बढे़गी। रोजगार पाने के अवसर में भी बढ़ोत्तरी होगी। सरकारी क्षेत्र में काम चल जाता है पर प्राइवेट कंपनियों में टेक्नोलॉजी मायने रखती है।
निशांत, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक छात्र
विदेश में भी पा सकेंगे नौकरी
पुराने सिलेबस को बदलकर नई तकनीकी को सिलेबस में शामिल किया जाए तो आईटीआई के छात्रों को रोजगार की कमी नहीं होगी। देश में बल्कि विदेशों में भी वह काम करने के काबिल बन सकेंगे।
हर्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक छात्र