सत्तर फीसदी को भरना होगा तिमाही रिटर्न
- जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों की समस्या कम करने के लिए उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जीएसटी काउंसिल ने पांच करोड़ तक सालाना टर्न ओवर का व्यापार करने वालों को तिमाही रिटर्न जमा करने की सुविधा प्रदान कर दी है। इस सुविधा से जोन के 48 हजार पंजीकृत व्यापारियों में सत्तर फीसदी लाभान्वित होंगे। साथ ही, राजस्व स्थिर होने पर लग्जरी और अहितकारी वस्तुओं पर ही 28 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
जीएसटी में टैक्स की दरें 0, 5,12, 18 और 28 प्रतिशत निर्धारित की गई हैं। इस व्यवस्था में व्यापारियों को हर महीने तीन और साल में कुल 37 बार रिटर्न दाखिल करना है। व्यापारियों को अभी अलग-अलग तिथियों में जीएसटीआर 3 (बी) बिक्री, जीएसटीआर (वन) सप्लाई और जीएसटीआर (टू) खरीद-बिक्री दोनों का मिश्रित रिटर्न जमा करना पड़ रहा है। जबकि वैट में 13 बार ही रिटर्न दाखिल करने पड़ते थे। इसमें हर महीने एक-एक और साल का एक रिटर्न शामिल था। हालांकि, जीएसटी में समाधान योजना और डेढ़ करोड़ रुपये तक सालाना का कारोबार करने वालों को जरूर त्रैमासिक रिटर्न जमा करने की सुविधा है।
देखने में आ रहा था कि रिटर्न भरने में आ रही दिक्कतों के कारण अधिकतर व्यापारी जीएसटीआर (टू) जमा नहीं कर रहे हैं, जिससे विभाग के लिए आगे टैक्स इनवाइस से मिलान करना मुश्किल होगा। दूसरा, एक महीने में तीन टैक्स जमा करने की व्यवस्था के कारण व्यापारी स्वस्थ मन से व्यापार भी नहीं कर पा रहा है। इस कारण जीएसटी काउंसिल की 22 जुलाई को दिल्ली में हुई बैठक में पांच करोड़ तक का सालाना व्यापार करने वालों को त्रैमासिक रिटर्न जमा करने की सुविधा देने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय 27 जुलाई के बाद प्रभावी हो जाएगा।
दूसरा, अब 28 वस्तुओं पर ही 28 प्रतिशत टैक्स लग रहा है। शुरुआत में यह संख्या 226 थी। जानकार सूत्रों का मानना है कि भविष्य में सरकार का राजस्व स्थिर होने पर जीएसटी काउंसिल 28 प्रतिशत के स्लैब को और तर्कसंगत बना सकती है। 28 प्रतिशत टैक्स सिर्फ लग्जरी आइटम और अहितकर (गुटखा, सिगरेट आदि) वस्तुओं तक ही सीमित रह जाएगा। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर विमल कुमार ने बताया कि सालाना पांच करोड़ रुपये टर्न ओवर वाले नियम से जोन के सत्तर फीसदी व्यापारी लाभान्वित होंगे।
अधिकारियों ने शुरू किया सत्यापन
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जीएसटी में पंजीकृत अधिकतर व्यापारी जीएसटीआर वन और टू रिटर्न फार्म दाखिल करने से बच रहे हैं। व्यापारी रिटर्न दाखिल क्यों नहीं कर रहे हैं? उनकी समस्या का पता करने के लिए कमिश्नर मुख्यालय ने सहायक कमिश्नर और सीटीओ स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह व्यापारी के कार्य स्थल पर पहुंचकर रिटर्न न भरने का कारण जानें। अगर उनको रिटर्न भरने में कोई समस्या आ रही हैं तो उसका मौके पर निस्तारण करें। अधिकारियों ने ऐसे व्यापारियों के कार्यस्थल पर पहुंचकर सत्यापन का काम शुरू कर दिया है।
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झांसी जोन के सात जिलों में (झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा व चित्रकूट) में 48 हजार पंजीकृत व्यापारी हैं। जीएसटी से पूर्व झांसी जोन में 32 हजार व्यापारी पंजीकृत व्यापारी थे।