किसान अभी करें खरीफ की बुवाई, होगा फायदा
- सामान्य मानसूनी बारिश से मिल गई भूमि को पर्याप्त नमी
- कम अथवा ज्यादा पानी दोनों में बेहतर होता तिल उत्पादन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। दो सप्ताह से सामान्य बरसात हो रही है। इससे भूमि में पर्याप्त नमी आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय किसानों के लिए भूमि की तैयारी और खरीफ फसलों की बुवाई करने के लिए उपयुक्त है। किसान यदि अभी खरीफ की बुवाई करते हैं तो उन्हें अच्छा उत्पादन मिलेगा।
बुंदेलखंड में खेती करने में आ रही समस्याओं का प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर सामना किया जा सकता है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि खरीफ में होने वाली फसलें जैसे मूंग, उड़द, तिल और मूंगफली की बुवाई के लिए जमीन की तैयारी करने का यह सही समय है। तिल की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि तिल कम और ज्यादा पानी दोनों ही परिस्थितियों के लिए बेहतर फसल है। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी की जुताई कर भुरभुरा कर लें। मृदा उपचार के लिए फोरेट10-जी पांच किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। तिल की बुवाई 15 से 20 जुलाई तक अवश्य कर लें, ताकि रबी की फसलों की बुवाई समय से की जा सके। बीज को ठीक तरह से उपचारित करने के लिए बाबिस्टीन की दो ग्राम प्रति किलो बीज में मिलाएं।
उन्होंने जैविक खाद पर जोर देते हुए कहा कि किसान खेतों में गोबर की खाद 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें। बीज एवं गोबर की खाद का अनुपात 1:20 रखने से सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होंगे। जो किसान रबी में फसल लेते हैं या खेत को खाली छोड़ देते हैं, उन्हें खेतों में हरी खाद के रूप में ढेंचा का प्रयोग करना चाहिए। इससे खेतों में जीवांश की मात्रा बढ़ने के साथ पैदावार अच्छी होती है। तिल की प्रमुख प्रजातियां जैसे आरटी- 351, शेखर, प्रगति और तरुण उत्पादन के लिए अच्छी हैं। पिछले साल किसानों ने विश्वविद्यालय के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत उन्नत किस्म एवं वैज्ञानिक विधि से विकसित तिल में 37.8 प्रतिशत की पैदावार में वृद्धि हासिल की।
तिल के अलावा मूंग, उड़द, मूंगफली का भी अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बेहतर उत्पादन के लिए फसलों की समय पर बुवाई व सहफसली प्रणालियों को अपनाना लाभदायक है। फसलों को देर से बोने पर बीमारियां होने से उत्पादन प्रभावित होता है। तिल में उर्वरकों के प्रयोग के लिए वर्षा आधारित स्थानों पर 30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर एवं 20 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। मूंगफली के लिए 250 किलोग्रम जिप्सम व चार किलोग्राम बोरडेक्स प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से निश्चित फायदा होगा।