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पुनावलीकलां मे मिले सती पट के

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पुनावलीकलां में चट्टान पर मिले रामायण प्रसंग के चित्र
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झांसी। रक्सा क्षेत्र में स्थित पुनावलीकलां गांव के पीछे चिराऊ की पहाड़ी पर मुगल कालीन भित्ति चित्र मिले हैं। पत्थर पर बनाए गए इन चित्रों में रामायण प्रसंग को उकेरा गया है। भगवान राम और लक्ष्मण युद्ध मुद्रा में दिख रहे हैं तो हनुमान का अलग चित्र उकेरा गया है। एक बड़े पत्थर के ऊपर शिवलिंग बने हैं। माना जा रहा है कि मुगल काल में यह तीर्थ स्थान रहा होगा।
महानगर से पुनावलीकलां गांव 14 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव से दो किलोमीटर पीछे अंबावाय रजवाहा नहर से सटी पहाड़ी है। इस पहाड़ी की अलग-अलग चट्टानों पर रामायण प्रसंग के चित्र बने मिले हैं। इन पर भगवान राम और लक्ष्मण युद्ध मुद्रा में दिख रहे हैं तो हनुमान का अलग चित्र उकेरा गया है। एक बड़े पत्थर के ऊपर शिवलिंग बने हैं। पिछले दिनों गांव वालों की सूचना पर यहां पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने सर्वे किया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह चित्र 500 साल पहले मुगल काल में बनाए गए होंगे। पहाड़ी पर पानी का स्रोत मिला है। इससे लगता है कि यह क्षेत्र तीर्थ स्थान रहा होगा।
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पुरातत्व अधिकारी एसके दुबे ने बताया कि चट्टानों पर जो चित्र उकरे मिले हैं, वह मुगल कालीन लग रहे हैं। पुरुषों ने जो पाजामा पहन रखे हैं उनसे मुगल काल का पता लगता है। मनोरम पहाड़ी है। अवैध खनन से इस पहाड़ी के पानी के स्रोत को कम किया जा रहा है। ग्राम सभा चाहे तो इस स्थान को दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित कर सकती है। बरसात के बाद वह दोबारा यहां सर्वे करेंगे। आसपास क्षेत्र भी देखा जाएगा।


सुनसान इलाका होने के कारण इक्का दुक्का गांव वाले ही यहां जानवर चराने आते हैं। यहां पहाड़ी के बीच से पानी निकलता था, लेकिन अवैध खनन के कारण पानी का स्रोत खत्म होता जा रहा है। अभी भी दो फीट पर पानी निकल आता है। - वनमाली साहू, गांववासी।


कई लोगों को भ्रम है कि यहां पहाड़ी में सोना है। इसलिए लोग यहां नारियल चढ़ाने आते हैं। कई लोगों ने खुदाई भी की, लेकिन हाथ कुछ नहीं आया। जिला प्रशासन अगर इस तरफ ध्यान दे तो यह स्थान दर्शनीय स्थल बन सकता है। - बब्बू राजा गुर्जर, गांववासी।
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चट्टानों पर जन्म से यह आकृतियां देख रहे हैं। गांव से दूरी अधिक होने के कारण लोग यहां पूजा करने नहीं आते। पुरातत्व विभाग के सर्वे के बाद उनको पता लगा कि यह मुगल कालीन चित्र है। - बलवीर राजपूत, गांववासी।
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